सम्बन्ध

अरुणिता
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प्रिये क्या सम्बन्ध है ?
मेरा और तुम्हारा
कि मै खिचा चला
आता हूं
तुम्हारी तरफ
अकारण ही बरबस
प्रिय तुम्हारी गर्म गर्म
प्र श्वास करती है मुझमें
जीवन का संचार
प्रिये क्या मै निस्वार्थ
ही करता हूँ यह सब
नही प्रिय मेरी शीतल
निश्वास भी करती है
तुम्हारे प्राणों का पोषण
इस प्रकार हम
पूरक हैं एक दूसरे के
पुष्पलता बोली

देवेन्द्रपाल सिंह प्रवक्ता रसायन
जी आई सी फौजीमटकोटा ( उधमसिंहनगर)
उत्तराखंण्ड

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