ग़ज़लनामा
ग़ज़ल
उसने फिर से बयान बदला है , तीर बदला , कमान बदला है। आज छू लेगा आसमां पंछी , सुब्ह उसने उड़ान बदला है। …
उसने फिर से बयान बदला है , तीर बदला , कमान बदला है। आज छू लेगा आसमां पंछी , सुब्ह उसने उड़ान बदला है। …
वो जब मुझसे बिछड़ा होगा , दर-दर कितना भटका होगा। गठरी लोग टटोले होंगे , जब परदेशी लौटा होगा। आज किस…
झूठ का जयघोष नित होता रहा , कुंभ करणी नींद सच सोता रहा। सेठ जी के सब दरीचे बन्द थे , भूख से दर पर कोई रोता …
मुझे क्यूँ चाँद का धोका हुआ है अभी तू छत पे क्या आया हुआ है डुबो दो पाँव आकर झील में तुम कि पानी शाम से ठहरा हुआ है…
धूप को फूल खल रहे होंगे, खेत के पाँव जल रहे होंगे | जाति औ फ़िरके वाले सांचे में, आज बच्चे भी ढल रहे होंगे | हो रही कोठ…