प्रमोद झा
पिता: सशक्त कविता पुस्तक
मीन केतन प्रधान की मार्मिक कविताएं पिता की आवाज गायब हो गयी है पैरालिसिस से मैं सुन रहा होता बहुत कुछ अनकही ब…
मीन केतन प्रधान की मार्मिक कविताएं पिता की आवाज गायब हो गयी है पैरालिसिस से मैं सुन रहा होता बहुत कुछ अनकही ब…
क्रांति हूं मैं क्रांति हूं अशांति पर मैं क्रांति हूं अन्याय पर मैं क्रांति हूं अत्याचार पर मैं क्रांति हूं …
लहनदार भट्टी से निकलने वाली आग की लाल चिन्गारियों के बीच लोहा और पत्थर कूटने वाले बन्जारों को कभी आपने देखा है चलिए, छो…
ओ करूणा, तेरी आँखों में आँशु हमेशा रोती रहती है क्या रात भर तू सोती नहीं है जब भी तुम्हारे बारे में सोचता हूँ कितन…