नवीन माथुर पंचोली
ग़ज़ल
1 इसने , उसने , सबने मारा। फिर भी ज़िंदा है बेचारा। हमसे अपनी बातें कहकर , उसने दिल का बोझ उतारा। …
1 इसने , उसने , सबने मारा। फिर भी ज़िंदा है बेचारा। हमसे अपनी बातें कहकर , उसने दिल का बोझ उतारा। …
उसने फिर से बयान बदला है , तीर बदला , कमान बदला है। आज छू लेगा आसमां पंछी , सुब्ह उसने उड़ान बदला है। …
1 अंधियारों से तो ये डर बोलेगा जाकर दरबारों से कौन मगर बोलेगा जाकर ये बोलेगा इससे , उससे वो बोलेगा सरका…
1 . बिन कारण उस रस्ते जाना रहता है। जिस रस्ते कोई पहचाना रहता है। आँखें जितना तीरों को समझाती हैं , उ…
जो कभी बुझती नहीं वो प्यास होती जा रही है ज़िन्दगी अब तो यहाँ बनवास होती जा रही है जो कभी मजबूत थी , निरप…
एक झिझक सी मुझे इजहार में आ जाती है। हर वक़्त ये क़सक़ मेरे प्यार में आ जाती है।। सोच कर तुमको जब भी कहता हूँ गज़ल।…