ग़ज़लनामा
ग़ज़ल

ग़ज़ल

1 इसने , उसने , सबने मारा। फिर भी ज़िंदा   है बेचारा।   हमसे अपनी बातें कहकर , उसने दिल का बोझ उतारा।  …

ग़ज़ल

ग़ज़ल

उसने फिर से बयान बदला है , तीर बदला , कमान बदला है।   आज छू लेगा आसमां पंछी , सुब्ह उसने उड़ान बदला है। …

ग़ज़ल

ग़ज़ल

1 अंधियारों से तो ये डर बोलेगा जाकर दरबारों से कौन मगर बोलेगा जाकर   ये बोलेगा इससे , उससे वो बोलेगा सरका…

ग़ज़ल

ग़ज़ल

1 . बिन कारण उस रस्ते जाना रहता है। जिस रस्ते   कोई   पहचाना रहता   है।   आँखें जितना तीरों को समझाती हैं , उ…

ग़ज़ल

ग़ज़ल

जो कभी बुझती नहीं वो प्यास होती जा रही है   ज़िन्दगी अब तो यहाँ बनवास होती जा रही है     जो कभी मजबूत थी , निरप…

ग़ज़ल

ग़ज़ल

एक झिझक सी मुझे इजहार में आ जाती है। हर वक़्त ये क़सक़ मेरे प्यार में आ जाती है।।   सोच कर तुमको जब भी कहता हूँ गज़ल।…

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