ग़ज़लनामा
ग़ज़ल

ग़ज़ल

1 . बिन कारण उस रस्ते जाना रहता है। जिस रस्ते   कोई   पहचाना रहता   है।   आँखें जितना तीरों को समझाती हैं , उ…

ग़ज़ल

ग़ज़ल

जो कभी बुझती नहीं वो प्यास होती जा रही है   ज़िन्दगी अब तो यहाँ बनवास होती जा रही है     जो कभी मजबूत थी , निरप…

ग़ज़ल

ग़ज़ल

एक झिझक सी मुझे इजहार में आ जाती है। हर वक़्त ये क़सक़ मेरे प्यार में आ जाती है।।   सोच कर तुमको जब भी कहता हूँ गज़ल।…

ग़ज़ल

ग़ज़ल

1 बात     नहीं     हैरानी     की। अक़्सर जीत जवानी   की।   सीधे   दिखने   वालों   की , आदत     है   शैतानी…

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