शैनेन्द्र कुमार
बेटा और पिता
दो घंटे पढ़कर ही अक्सर , मैं कह देता हूँ—थक गया हूँ , ए.सी. की ठंडी छाँव में बैठा , फिर भी जाने क्यों रुक गया…
दो घंटे पढ़कर ही अक्सर , मैं कह देता हूँ—थक गया हूँ , ए.सी. की ठंडी छाँव में बैठा , फिर भी जाने क्यों रुक गया…