काव्य-सरिता
आज समाज कहाँ आ गया
आज समाज कहाँ आ गया , रिश्ते सब पीछे छूट गए। सब दूर के रिश्तों में खुश हैं , घर बैठे बूढ़े माँ-बाप फ़िज़ूल ह…
आज समाज कहाँ आ गया , रिश्ते सब पीछे छूट गए। सब दूर के रिश्तों में खुश हैं , घर बैठे बूढ़े माँ-बाप फ़िज़ूल ह…