आज़ादी के इन दीवाने : अशफाक उल्लाह खाँ
देश गुलामी में कराह रहा था , अंग्रेजों का अत्याचार दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा था | देश को आजाद कराने के लिए संघर्…
देश गुलामी में कराह रहा था , अंग्रेजों का अत्याचार दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा था | देश को आजाद कराने के लिए संघर्…
आओ लिखें हम एक नयी कहानी , जिसमें न कोई राजा हो न रानी। बस उसमें गांवों की स्वच्छ हवा हो , और हो बूढ़े कुंए क…
सेना मेडल (मरणोपरांत) दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं एक वह जो केवल दिन भर अपने में ही व्यस्त रहते हैं, अपने बारे मे…
सेना के शौर्य का प्रतीक ऑपरेशन विजय (कारगिल) वही लड़ाई थी जिसमें पाकिस्तानी सेना ने द्रास , कारगिल , बटालिक की गगन…
अहिल्या बाई होल्कर परहित को अपना काम मानकर जो लोग समाज में काम करते हैं , वह इस नश्वर शरीर के मिट जाने के बाद भी लोगों …
परतंत्रता उस बेबसी का वह नाम है जिसमें परतंत्र जीव के मन, आचार, विचार, व्यवहार, शिक्षा और संस्कृति पर कुठाराघात होता है…
जनवरी के महीने में कड़ाके कि ठंढ़ पड़ रही थी | लोग अपने घरों में पहने ओढ़े दुबके हुए थे | घर से बाहर निकलने की हिम्मत कम…
(18 नवम्बर ) जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आंख में भर लो पानी। जो शहीद हुए हैं उन…
जीतेन्द्र सिंह : कीर्ति चक्र एक सैनिक अपनी मातृभूमि के लिए सदैव अपना सर्वस्व बलिदान करने के लिए तैयार रहता है चाह…
खूब लगाओ पेड़ धरा पर, फैलाओ हर जगह हरियाली। पर याद रहे उनको पानी देना, सुबह शाम तुम्हें पेड़ों के माली । सुबह…
ब्रिगेडियर अमरिंदर सिंह कसाना, वीर चक्र 1999 का युद्ध (ऑपरेशन विजय) आजादी के 52 साल बाद लड़ा गया था। भ…
मां और मातृभूमि दो ऐसे संबंधात्मक शब्द हैं जिनका नाम लेते ही श्रद्धा और आदर से सिर झुक जाता है, इनका जितना वंदन तथ…