डॉ० पल्लवी सिंह 'अनुमेहा'
शब्द और भाव
शब्द है जैसे नभ के तारे , भाव है जैसे चाँद की चांदनी। शब्दों से सजती है भाषा , …
शब्द है जैसे नभ के तारे , भाव है जैसे चाँद की चांदनी। शब्दों से सजती है भाषा , …
जो किसी को भी दिखाई न दे ऐसे कच्चे धागों की डोर में …