नलिन खोईवाल
कागज की नाव चले हैं

कागज की नाव चले हैं

प्रकृति का रूप निराला , मन को कितना भाता है ,  इतनी सुंदर छवि पाकर , कोयल का मन गाता है।   बरसे जब बूँदे …

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