उम्र हमारी जिन्दगी भी हमारी

अरुणिता
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उम्र हमारी, ज़िंदगी भी हमारी

उम्र पूछते हैं लोग हमारी,

जैसे कोई राज़ पुराना है।

हम मुस्कराकर कहते हैं—

उम्र ही तो बढ़ी है साहब,

दिल कहाँ माना है!

 

उम्र बढ़ी तो घरवालों ने

प्यार से समझाया—

“अब आप आराम कीजिए,

बहुत काम कर लिया।”

 

हमने कहा—

“आराम तो कर लेंगे,

पर आराम करके करेंगे क्या?”

 

सुबह चश्मा ढूँढ़ें,

चश्मा मिले तो मोबाइल;

मोबाइल मिले तो पासवर्ड—

याद करते-करते भूल गए,

मोबाइल खोला ही क्यों था—यह भी भूल गए!

 

ओटीपी आए छह अंकों का,

हम पढ़ें, समझें, भरें—

तब तक मोबाइल बोले—

“ओटीपी एक्सपायर्ड!”

 

हम बोले —

"भाई, उम्र तो देख!

ओटीपी भेज रहा है

या परीक्षा ले रहा है?”

 

डॉक्टर ने फरमान सुनाया—

नमक, मीठा, तला-भुना—सब बंद!

हमने पूछा—

“फिर बचा क्या?”

बोले—“सलाद।”

 

हमने कहा—

“तो डॉक्टर साहब,

सलाद भी आप ही खाइए!

इतना परहेज़ करेंगे तो

स्वाद ही हमसे रूठ जाएगा।”

 

कुछ चीज़ें धीमी हुई हैं—

कदम कहते हैं—“धीरे चलो।”

दिल कहता है—

“चलना मत छोड़ो!”

 

बालों ने रंग बदला,

झुर्रियाँ भी आईं।

आईने से पूछा—

“इतनी झुर्रियाँ क्यों?”

आईना बोला—

“झुर्रियाँ नहीं जनाब,

ज़िंदगी की लिखावट है!”

 

हमें दया नहीं—अवसर चाहिए,

सिर्फ़ सहारा नहीं—साथ चाहिए।

सलाह बहुत मिलती है,

कभी हमारी राय भी पूछिए।

 

हम कोई बीती कहानी नहीं,

अनुभव के दीप हैं।

ख़ुद जलते हैं,

दूसरों को राह दिखाते हैं।

 

चाल भले धीमी हो,

हौसले अब भी जवान हैं।

हम वरिष्ठ हैं—

पर विराम नहीं!

 

उम्र हमारी है,

ज़िंदगी भी हमारी है—

जनाब, कहानी अभी बाकी है!


अमृत कुमार गोयल

फ्लैट न. 303, टावर न. 3, आम्रपाली ग्रैंड,

सेक्टर–जीटा–1, ग्रेटर नोएडा–201306,

गौतम बुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश

मोबाइल : +91-9411043774

ई-मेल : amrit.goyal6@gmail.com

 

अमृत कुमार गोयल

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