नवीन माथुर पंचोली
ग़ज़ल
1 इसने , उसने , सबने मारा। फिर भी ज़िंदा है बेचारा। हमसे अपनी बातें कहकर , उसने दिल का बोझ उतारा। …
1 इसने , उसने , सबने मारा। फिर भी ज़िंदा है बेचारा। हमसे अपनी बातें कहकर , उसने दिल का बोझ उतारा। …
1 . बिन कारण उस रस्ते जाना रहता है। जिस रस्ते कोई पहचाना रहता है। आँखें जितना तीरों को समझाती हैं , उ…
1 बात नहीं हैरानी की। अक़्सर जीत जवानी की। सीधे दिखने वालों की , आदत है शैतानी…