नवीन माथुर पंचोली
ग़ज़ल

ग़ज़ल

1 . बिन कारण उस रस्ते जाना रहता है। जिस रस्ते   कोई   पहचाना रहता   है।   आँखें जितना तीरों को समझाती हैं , उ…

ग़ज़ल

ग़ज़ल

1 बात     नहीं     हैरानी     की। अक़्सर जीत जवानी   की।   सीधे   दिखने   वालों   की , आदत     है   शैतानी…

ग़ज़ल

ग़ज़ल

कहाँ अब आसमानों की कमी है। परों   में ही   उड़ानों   की कमी है।   सड़क को देखकर सोचा किये सब , नगर   में आशियान…

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