ओढ़कर ओढ़नी
रोशनी की -
आयी फ़िर
दीवाली की रात ।
सजाकर
रंगोली की महावर -
पहन दीयों
के बिछुए ।
झालरों की
रुनझुन-रुनझुन -
अब मोहित कर
मन छुए ।
लगता रोशनी
के झील से -
आयी फ़िर
दुल्हन सद्य:स्नात।
रचाकर
मांडणों की मेंहदी -
डाल
बंदनवारों का हार ।
अभिनंदन को
हैं आतुर ये -
हाथ जोड़
घर-ऑंगन-द्वार ।
उत्सव की
पावन-बेला में क्या -
है
अमावसी-तम की औकात ।
मन में अब
फूल - से झर रहे हैं -
ख़ुशियों के
फुलझड़ी - अनार ।
पलक पांवड़े
बिछाए स्वागत में -
खड़ी अब
दीयों की क़तार ।
घराती हाथों
में लिये खड़े अब -
आशीर्वचनों
की सौगात ।
अशोक आनन
जूना
बाज़ार , मक्सी
जिला
- शाजापुर ( म.प्र.)
पिनकोड
: 465
106
M.N. - 9977644232

