जो मिले जिंदगी में अंधकार कभी,
ठहर कर खोजना रोशनी भी है वहीं।
उम्मीद की एक
किरण जो है वहीं,
अंधकार को चीर देगी तभी।
अंधेरा या रोशनी तुम्हें ही चुनना होगा,
पथ पर टिकना या भटकना, तय
होगा तभी।
अगर चाहो तो भटकोगे न कभी भी,
मंजिल
मिलेगी, मिलकर ही रहेगी तभी।
ठोकर खाना कोई बड़ी बात भी नहीं,
उठकर
चल पाओ, गर्व करना तभी।
हर ठोकर एक नई सीख दे जाएगी,
इस
राह में तुम्हें तुमसे मिलाएगी तभी।
चमकना है स्वर्ण जैसे तो चोट खानी होगी,
बिना संघर्ष मंजिल मिलेगी न सही।
हर चोट तुम्हें और निखारती ही जाएगी,
लक्ष्य की ओर तुम्हें आगे बढ़ाएगी।
हर अंधकार, हर ठोकर, हर चोट,
याद रखना, न भूलना कभी
भी।
संघर्ष की हर याद नयी राह दिखाएगी,
भूलकर भी इसे भूलना न कभी भी।
गुंजन
कौशल
सहायक
अध्यापक
संविलयन
विद्यालय बुंटा
थानाभवन, शामली
उत्तर
प्रदेश

