जीवन के नित संघर्षों से
मन विचलित मेरा हो न सका
।
मन भटका मेरा इधर उधर
लेकिन कुपंथ पर चल न सका
।।
मन इन्द्री वाणी पर संयम
रख
मै नित आगे बढ़ता ही रहा
।
संघर्षों से अनुभव मिलते
रहे
जीवन पथ पर चलता ही रहा
।।
कुछ मिले अजनबी लोग मुझे
नित नई राह दिखलाते गए
मै अपने पथ पर अडिग रहा
चलता ही रहा बढ़ता ही
रहा ।।
कुछ खार मिले जीवन पथ पर
खारों से बच कर चलते ही
रहे ।
संकल्प हमारा था चलना
चलते ही रहे बढ़ते ही
रहे ।।
मिल गई थी मुझको राह
सुगम
संघर्ष हमारे सब खत्म
हुए ।
जीवन में उन्नति के पथ
पर
चलते ही गए बढ़ते ही गए
।।
उत्तम कुमार तिवारी
" उत्तम"
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
भारत
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