आज समाज कहाँ आ गया,
रिश्ते सब पीछे छूट गए।
सब दूर के रिश्तों में खुश हैं,
घर बैठे बूढ़े माँ-बाप फ़िज़ूल हो गए।
सब दिखावे की ज़िंदगी जी रहे हैं,
सबको आगे बढ़ने की होड़ है।
इंसान तो सब ज़िंदा हैं,
लेकिन इंसानियत कहीं खो गई है।
बच्चों ने भी माँ-बाप से दूरी बना ली,
सोशल मीडिया की दुनिया में खोने लगे हैं।
किताबों से दूरी बना ली,
मोबाइल से नज़दीकियाँ बढ़ा लीं।
कुछ पल अपनों के साथ हँसी के बिताओ,
उन्हें भी एहसास कराओ कि हम हैं।
बच्चों को प्यार की ज़रूरत है,
हर बात पर डाँट की नहीं।
इंसानियत को फिर से ज़िंदा करो,
झूठे दिखावे से दूर रहो।
रिश्तों को समय और अपनापन दो,
अपनों के साथ कुछ पल मुस्कुराकर जियो।
क्योंकि ज़िंदगी सिर्फ़ मोबाइल की स्क्रीन नहीं,
अपनों के साथ बिताए पलों का नाम है।
आचार्या शिखा चंदेल

