पाप का फल

अरुणिता
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अपनी पीठ,छाती और घुटनों पर लगे हल्दी चूने के लेप को दिखाते हुए मुरारी ने मनोहर की ओर देख कर कहा "भाई! बच्चों की किस्मत और आपकी दुआ से जिंदा बच गया,उसने तो मार डालने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।,हाय रे !" मुरारी ने कराहते हुए कहा। मनोहर ने चौंकते हुए कहा "क्या कहे जा रहे हो?किसने मार डालने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ये हल्दी चूना लगाए पड़े हो मुरारी! आख़िर हुआ क्या?"। इतना सुनते ही मुरारी तमतमा गया और बोला "तुम, तुम दोस्त थोड़ी हो, दोस्त के रूप में पुराने दुश्मन हो मनोहर! , कल शाम से लेकर आज सबेरे तक लड़का तुम्हारे घर के चार चक्कर लगा चुका है। एक ही खबर लेकर ही बापस आता रहा कि, वह सरकारी राशन की दुकान पर राशन लेने गए हैं। अब आए हो तो मजा ले रहे हो यार!, हद कर दी तुमने।"। मुरारी की बात सुनकर मनोहर ने थोड़ी ऊंची आवाज़ में कहा "यानी तुम समझते हो कि घर बालों ने झूठ कह दिया, कि हम राशन लेने गए थे।गए थे भाई सच में गए थे।,शाम को अपना कार्ड लेकर गए थे ,और सबेरे भाई भतीजों के साथ उनका राशन दिलवाने चले गए थे।दरअसल दुकानदार के घर नए मेहमान के आने का समय चल रहा है, पता नहीं कब108को फोन करना पड़ जाए उसे ,और वह बीबी को अस्पताल लेकर चला जाए। मुफ़्त में अपना राशन चार छह दिन के लिए खटाई में पड़ जाता । मसला ये था, मुरारी भाई!, हाँ अब बताओ यह तुम्हारी दुर्दशा किसने कर दी । हालत तो तुम्हारी बहुत पतली दिख रही है।हालत देखकर ऐसा लग रहा है कि ,तुम् दर्द से बिल्कुल मरे ही से जा रहे हो। तुम्हारी चोट देखकर मुझे ऐसा महसूस हो रहा है कि , धन्य हो तुम जो झेल रहे हो ,हम तो कसम से मर गए होते। कुछ बोलो तो बताओ तो,ये हालत बनाई किस ने तुम्हारी।"। इतना सुनते फफक कर रो पड़ा मुरारी ।, दो तीन बार पलकें झपकाइं फिर मनोहर की ओर देख कर"कहा सांडों ने। "। सांडों ने मतलब, क्या कई सांड एक साथ पिल पड़े थे तुम्हारी खातिरदारी में ,"मनोहर अचंभित वाले अंदाज में कहा । हाय रे, दो थे सांड मनोहर!, एक सामने से हमला करता और मुझे उछाल देता ,और फिर उसी तरह पीछे वाला सांड पीछे से उछाल देता "मुरारी ने कहा। "मतलब मुरारी भाई तुमको,बिल्कुल फुटबाल बनाकर रख दिया सांडों ने ,, लेकिन अचंभित हूं कि, इतनी पिलाई के बाद भी तुम जिंदा,, जिंदा बच कैसे गए यार,! इतने में तो तुमको मर जाना चाहिए था मुरारी भाई!"मनोहर ने कहा

"मनोहर भाई ठीक कह रहे , दोनों सांडों के आक्रामक अंदाज़ देखकर मुझे लग रहा था कि अब मरे, तब मरे, कब मरे,।लेकिन मेरा करुनक्रन्दन सुनकर आस पास के खेतों में काम करने वाले लोग लट्ठ लेकर दौड़कर आए और जब दोनों सांडों पर पिले ,तब बड़ी मुश्किल से सांड हमसे दूर हटे। मनोहर भाई,यह हाँथ फूला देख रहे हो, सांडों पर चलने वाली लोगों की एक लाठी हमारे हाँथ पर लग गई, खटाक से लाठी की आवाज़ हुई।हाँथ हिल तक नहीं रहा है।लगता हाँथ भी गया काम से।"। "अरे मुरारी !,कमाल ही हो गया सच में, बहुत चोट खाए हो यार,,, लेकिन इसमें सांडों की गलती क्या है।?"। ,", बहुत अच्छे मनोहर, तुम्हारे कहने का मतलब कि सारी गलती मेरी है " मुरारी ने खीजते हुए कहा। मनोहर ने गंभीर होकर कहा"गाय जब तक दूध देती है, सभी मस्ती में दूध का आनंद लेते हैं, और जब दूध छूट जाए तो गाय को बछड़े सहित खूंटा से मुक्त कर देते हैं।क्या यह गलती हमारी नहीं ? जिसे देखो एक ही बात कहता है कि इनको अब कोई पूछता नहीं,। कौन पूछे भाई जब जिनकी थीं उन्होंने नहीं पूंछा मुरारी भाई!, लोगों को गाय और उनके बछड़े जंगलों में छोड़ने के बजाय खूंटे पर रखना चाहिए, कुछ नहीं देंगी गोबर तो देंगी ही यार! क्या वह खेतों के लिए उपयुक्त खाद नहीं होगी।" मनोहर की लम्बी स्पीच सुनने के बाद मुरारी ने कहा "पिछली साल हमनें भी तो गाय को इसी तरह छोड़ दिया था और साथ ही बछड़े को भी,पता नहीं मनोहर भाई,! यह उसी पाप का फल है क्या? " मुरारी की बात सुनकर मनोहर ने कहा" क्यों नहीं,? उसी का पाप दण्ड भी हो सकता है मुरारी भाई!, देखो हमारा तो स्पष्ट कहना है कि, ईश्वर करे जिन जिन लोगों द्वारा गाय एवं उनके बछड़ों को छोड़ा है या छोड़ रहे हैं या छोड़ने के क्रम में हैं ।उन सबको तुम्हारी तरह सांड पटक पटक मारें ,ताकि उनकी समझ में आ जाए कि जो पाप किया । उसी का फल मिल रहा है।अब ये हल्दी चूना के रंगे कपड़े निकाल कर दूसरे कपड़े पहनो, तुमको अस्पताल ले चलें।"

हाय रे एक तो सांड की पटकनी का दर्द और अब डा के इंजेक्शन झेलने पड़ेंगे। कहीं हाथ या पसली टूटी निकल आईं तो बेमौत ही मर जाएंगे। मरता क्या नहीं करता। दवाई तो लेनी ही पड़ेगी मनोहर भाई!, ऐसा करो अपनी भौजी से कहो कि जरा कपड़े दें आकर।"

रामबाबू शुक्ला

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