वो जब मुझसे बिछड़ा
होगा,
दर-दर कितना भटका
होगा।
गठरी लोग टटोले
होंगे,
जब परदेशी लौटा
होगा।
आज किसी पथ पर अबला
ने,
फिर से पत्थर तोड़ा
होगा।
आईने में झांक रहा
जो,
चिहरा जाने किसका
होगा।
सूरज सर पर आ जाने दो,
क़द तेरा भी बौना
होगा।
खेत तेरे भी ये
निगलेगा,
कल रस्ता जब चौड़ा
होगा।
ताड़ रहे हैं तुमको
ताजिर,
'ग़ैर' तेरा भी सौदा होगा।
अनुराग मिश्र ग़ैर

