दो लघुकथाएँ

अरुणिता
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मध्याह्न भोजन

स्कूल निरीक्षण के लिए जिला शिक्षा अधिकारी महोदय एक ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी स्कूल में पहुँचे थे। उन्होंने चौथी कक्षा के एक विद्यार्थी से पूछा, "बेटा, आप स्कूल क्यों आते हैं ?"

बच्चे ने बड़ी ही मासूमीयत से जवाब दिया, "क्योंकि यहाँ पेटभर खाना मिलता है।"

जिला शिक्षा अधिकारी अवाक रह गए। 

*****

आदर्श

"बेटा, तुम्हारे आदर्श कौन हैं ?"
"
सर, आदर्श मतलब ? मैं समझा नहीं कुछ ?"
"
यही कि तुम बड़े होकर क्या बनना चाहते हो ?"
"
सर, बड़ा होकर मैं खुद एक आदर्श बनना चाहता हूँ। मैं देश और समाज के हित में कुछ ऐसा करना चाहता हूँ कि लोग उसे अपना आदर्श मानें।"
"
शाबाश बेटा, मुझे तुम पर पूरा विश्वास है।" मास्टर जी ने उसकी पीठ थपथपाकर प्रोत्साहित करते हुए कहा।


डॉ प्रदीप कुमार शर्मा 

सीनियर एच.आई.जीII - 601, ब्लॉक-बी

कंचन अश्व परिसरडंगनिया

पो.ऑ. – पं. रविशंकर शुक्लविश्वविद्यालय

रायपुर (छ.ग.) 492010, मोबाइल नंबर : 9827914888

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