ग़ज़ल

अरुणिता
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1.

बिन कारण उस रस्ते जाना रहता है।

जिस रस्ते  कोई  पहचाना रहता  है।

 

आँखें जितना तीरों को समझाती हैं,

उतना उनका ठीक निशाना रहता है। 

 

सिर पर अपने भारी हो सोचें जितनी ,

मन को उतना बोझ उठाना रहता है।

 

जीवन एक सफर जैसा है कुछ इसमें,

मिलना-जुलना,खोना-पाना रहता है।

 

जिनसे अपने  सीधे  रिश्ते- नाते हैं,

साथ  उन्हीं के पीना-खाना रहता है।

 

लोग वही सब माचिस लेकर चलते हैं,

जिनका मक़सद आग लगाना रहता है।

 

2.

पुरानी  वही  तो  रिवायत  रहेगी।

घटा  की  हवा  से अदावत रहेगी।

 

निभाये  शरारत , जताये  शराफ़त,

यही हर किसी की शिक़ायत रहेगी।

 

अभी तक कही या सुनी जा रही है,

ज़ुबाँ पर  वही तो  कहावत रहेगी ।

 

नहीं कोई मुश्किल रहे इस सफ़र में,

बड़ों की  हमें कुछ हिदायत रहेगी।

 

रखेगा  यहाँ  जो  भुलावे, छलावे,

उसी  की  हमेशा  सियासत रहेगी।

 

कहानी यही  है  हमेशा दिलों की ,

वफ़ाओं के हिस्से  तिजारत रहेगी।

 

नवीन माथुर पंचोली

      अमझेरा जिला धार मप्र

            पिन 454441

          मो ,98993119724

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