दोहे

अरुणिता
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इच्छाओं में भागता, यह मन बारंबार।

मानो, पक्षी नापता, अंबर का विस्तार।।

 

कभी पड़ा सूखा यहाँ, कभी बाढ़ की मार ।

रही कृषक के भाग्य में, कष्टों की भरमार।।

 

हाय! यहांँ संसार की, कैसी ये तस्वीर।

झूठों को सौ सुख मिले, सच्चे भोगें पीर।।

 

अपनी पीड़ा को यहांँ, सुनने वाला कौन।

इससे तो अच्छा यही, रह जाएंँ हम मौन।।

 

इससे बढ़कर भी भला, होगा क्या संताप।

जब बेटे की लाश को, कंधा देता बाप।।

 

कौन दिशा में जा रहा, जाने आज समाज।

रिश्ते निभते हैं यहांँ, मोबाइल से आज।।

 

जीवन में जितना मिला, नहीं जिन्हें संतोष।

वे ही किस्मत को सदा, देते रहते दोष।।

 

माली ने बोए यहाँ, भांँति भांँति के फूल।

उग आए फिर किस तरह, कांँटे और बबूल।।

 

जीवन मुश्किल-सा लगे, कभी लगे आसान।

कभी उदासी घेरती, और कभी मुस्कान।।

 

कौन पराया है यहाँ, और कौन है ख़ास ।

धीरे-धीरे उठ रहा, अब सबसे विश्वास।।

 

प्रवीण पारीक 'अंशु'

राम कृपा कुंज, नजदीक सेतिया पैलेस, बाईपास रोड़, ऐलनाबाद,

सिरसा (हरियाणा), पिन कोड - 125102

मोबाइल नंबर : 9813561237 (whats app), 7015049996

ई-मेल: parveen.ellenabad@gmail.com

 

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