उन्मुक्त हंसी एक दवा है दोस्तों
हंसते
मुस्कुराते जीभर के जी लो
ना जाने कब
गमों का घेरा हो
हंसी से
गमों को भुलाना सीख लो।
चार दिन की
मिली है ये जिंदगी
कुछ पल
प्रभु की बंदगी कर लो
गिले शिकवे
जो भी मन में भरे
उनको भुलाकर
सबसे दोस्ती कर लो
ना जाने कब
गमों का घेरा हो
हंसी से
गमों को सजाना सीख लो।
उन्मुक्त
हंसी एक दवा है दोस्तों
हंसते
मुस्कुराते जीभर के जी लो
ना जाने कब
गमों का घेरा हो
हंसी से
गमों को भुलाना सीख लो।
जब भी
मुश्किल कोई जीवन में आए
राह कोई भी
नजर ना आए
चेहरे पर
फिर हंसी सजा कर तो देखो
रास्ते अपने
आप खुल जाएंगे
तभी तो कहते
हैं हर मर्ज की दवा है हंसी,
करिश्मा ये
हंसी का आजमाकर देख लो।
उन्मुक्त
हंसी एक दवा है दोस्तों
हंसते
मुस्कुराते जीभर के जी लो
ना जाने कब
गमों का घेरा हो
हंसी से
गमों को भुलाना सीख लो।
नीतू रवि
गर्ग "कमलिनी"
चरथावल, मुजफ्फरनगर
उत्तरप्रदेश

