पूरी तो तुम भूल गए हो

अरुणिता
By -
0


 

पूरी तो तुम भूल गए हो
बस टुकड़ा टुकड़ा याद हूं
बीते वक्त की बस
धुंधली सी याद हूं
प्रेम माधुरी छलका करती
मुस्कानों में सिमटी रहती
यादों सी मन में   रहती
थोड़ी थोड़ी याद हूं
माथे पर चुम्बन सी ठिठकी
बाहों में गलबहियां सी
आंखों में इंतजार की
मैं हल्की सी याद हूं।
भूल गया तू सपने दिखाकर
प्यार भरी भीगी रातें देकर
छोड़ गया तू बीच राह में
वह मैं तेरा प्यार हूं
आज भी सिसकी सी मैं मन में
ढ़ूंढ रही हूं अपने पन में
पल पल जीती मरती सी मैं
तेरे मन की सांझ हूं
निर्मोही हो नहीं कहूंगी
भूल गये हो नहीं कहूंगी

पास दूर का है ये खेला
बस मैं तेरी मीत हूं।
अनुबंधों पर नहीं टिकी हूं
कसमों को मैं नहीं मानती
मन का एक करार किया जो
उसका भूला बिसरा शब्द हूं।
बस थोड़ी सी याद हूं।

सुधा गोयल
2900-, कृष्णानगर, डा दत्ता लेन
बुलंदशहर -203001, उ०प्र० 
मोबाइल नंबर -9917869962

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Out
Ok, Go it!