जीवन जीना सहज न जानो

अरुणिता
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जीवन जीना सहज न जानो,

बहुत बड़ी फनकारी है,

खुद को भी खुश रखना,

खुद की ही जिम्मेदारी है।

 

रंग बदलना, ढंग बदलना,

देख के मौका, संग बदलना,

चेहरे के भोलेपन पर मत जाना,

सबके दिल में बसी हुई अय्यारी है।

 

दौड़ रहे हैं, भाग रहे हैं,

एक ही ताल पर नाच रहे हैं,

किसकी ये कलाकारी है,

जाने कौन इनका मदारी है।

 

फुर्सत नहीं किसी को भी,

रुकने को  दो पल की भी 

आज को खोकर हर कोई

करता कल की तैयारी है।

 

हालात की चौसर बिछी हुई है,

सबकी चालें सधी हुईं हैं,

इच्छाएँ सब लगी दाँव पर,

वक्त ही सबसे बड़ा जुआरी है।

 

खुशियों की तू भीख न मांग,

हर कोई यहाँ भिखारी है,

हँसते चेहरे पर मत जाना,

बहुत बड़ी अदाकारी है।

 

वैसे तो सब सुख है जीवन में,

दुःख नहीं है कोई मन में,

पर एक तुम्हारा साथ न होना

सब खुशियों पर भारी है।


 प्रज्ञा पांडेय मनु

वापी (गुजरात)

 

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