हमेशा बन के रहना तुम

अरुणिता
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छुपा लो आँखो मे मुझको 

पलक को बंद रखना तुम ।

कही निकल न जाऊं मै 

अश्क़ को रोके रहना तुम ।।

 

ह्रदय की तेज धड़कन से 

मेरी आवाज़ सुनना तुम ।

मेरे जीवन के मधुबन मे 

हमेशा खिलती रहना तुम ।।

 

कही आँसू की बरखा मे 

बह न जाऊँ आँखों से । 

कही जुल्फों की आँधी के

भवर मे फस न जाऊँ मैं ।। 

 

छुपा के दिल के परतो मे 

हमेशा बंद रखना तुम । 

निकल न जाऊँ दिल से मैं 

हमेशा दिल  मे रखना तुम।।

 

मेरे जीवन के हमराही 

हमेशा बन के रहना तुम 

कहीं खो न जाऊँ मैं 

पकड़ कर हमको रखना तुम

 


उत्तम कुमार तिवारी " उत्तम " 

लखनऊउत्तर प्रदेश

भारत

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