यह जीवन का सत्य है ….!
कि मौत निश्चित है
और नहीं जाना कुछ साथ ।
भले ही ….!
मृत्यु की पुस्तक में जीना हो
कठिन ।
फिर भी जीवन की डोर तो है
हमारे हाथ ।
ज़िंदगी है इक किताब……
जिसके पन्ने है बेहिसाब ।
कुछ पढ़ लिए कुछ पढ़ने बाक़ी
है ।
कितनी है उलझने ….!
कुछ सुलझ गई कुछ सुलझनी बाक़ी
है ।
नहीं है उम्र का इल्म !
कितनी बीत गईं कितनी बाक़ी है
!
कौन यहाँ कितना ठहर पाता है !
हर किरदार अपना फ़र्ज़ निभाता
है ।
एक अध्याय ख़त्म नहीं
दूसरा शुरू हो जाता है ।
कितने है ज़िंदगी के सवाल!
जिनके जवाब ढूँढ नहीं वो पाता
है ।
बस करता है वो वक़्त का
इंतज़ार
जिसके सहारे वह जीता जाता है
।
“ हर मुश्किल का हल है यहाँ
बस मृत्यु से अटल हमारा नाता
है ।
इसीलिए…..
जियो तो दिल से जियो क्योंकि
…
हमने ही लिखनी अपनी जीवन गाथा
है।
आशा भाटिया
