जीवन का सत्य

अरुणिता
By -
0

 


यह जीवन का सत्य है ….!
कि मौत निश्चित है
और नहीं जाना कुछ साथ ।
भले ही ….!
मृत्यु की पुस्तक में जीना हो कठिन ।
फिर भी जीवन की डोर तो है हमारे हाथ ।
ज़िंदगी है इक किताब……
जिसके पन्ने है बेहिसाब ।
कुछ पढ़ लिए कुछ पढ़ने बाक़ी है ।
कितनी है उलझने ….!
कुछ सुलझ गई कुछ सुलझनी बाक़ी है ।
नहीं है उम्र का इल्म !
कितनी बीत गईं कितनी बाक़ी है !
कौन यहाँ कितना ठहर पाता है !
हर किरदार अपना फ़र्ज़ निभाता है ।
एक अध्याय ख़त्म नहीं
दूसरा शुरू हो जाता है ।
कितने है ज़िंदगी के सवाल!
जिनके जवाब ढूँढ नहीं वो पाता है ।
बस करता है वो वक़्त का इंतज़ार
जिसके सहारे वह जीता जाता है ।
हर मुश्किल का हल है यहाँ
बस मृत्यु से अटल हमारा नाता है ।
इसीलिए…..
जियो तो दिल से जियो क्योंकि …
हमने ही लिखनी अपनी जीवन गाथा है।

आशा भाटिया

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Out
Ok, Go it!