ग़ज़ल

अरुणिता
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उसने फिर से बयान बदला है ,

तीर बदला,कमान बदला है।

 

आज छू लेगा आसमां पंछी,

सुब्ह उसने उड़ान बदला है।

 

वो नहीं थी कभी मेरी यारो,

अब मेरा भी गुमान बदला है।

 

वो गयी छोड़ कर जो बस्ती तो,

मैंने भी झट मकान बदला है।

 

रोग पर  रोग   घेर लेते  हैं 

खेत में फिर से धान बदला है।

 

खलबली-सी मची है हिरनों में,

फिर शिकारी मचान बदला है।

 

थक गया मैं सितारे गिन-गिन कर,

ग़ैर अब आसमान बदला है।

                    


अनुराग मिश्र ग़ैर
सहायक आबकारी आयुक्त
बजाज हिंदुस्तान शुगर लिमिटेड
गांगनौली, सहारनपुर 

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