1
इसने , उसने, सबने मारा।
फिर भी ज़िंदा है बेचारा।
हमसे अपनी बातें कहकर,
उसने दिल का बोझ उतारा।
सपने उसके
जैसे सबके,
लेकिन
वो किस्मत हारा।
फुटपाथों पर बीता उसका,
सोए - जागे जीवन सारा।
श्रमजीवी ,मजदूर हमेशा,
जीता
है जैसे बंजारा।
रोज़ कमाता,
रोज़ चुकाता,
करता है यूँ वक़्त गुज़ारा ।
भूख, ग़रीबी
साथी उसके,
जिसका दोषी देश हमारा।
2
अना
देखी नहीं
जाती।
फ़ना
रोकी नहीं
जाती।
बयाँ भी कर नहीं सकते,
ज़ुबाँ भी
सी नहीं जाती।
करें हम लाख कोशिश पर,
लगी दिल की नहीं जाती।
सभी कुछ पा लिया लेकिन,
कमी
अपनी नहीं जाती।
ग़मों
की भीड़
में अक्सर,
ख़ुशी
बाँटी नहीं
जाती।
किसी
से राज़ की बातें,
सभी पूछी
नहीं जाती।
3
थोड़ी
और जवानी बाक़ी।
थोड़ी
सी नादानी बाक़ी।
पंछी
की परवाजों में हैं,
थोड़ी
और रवानी
बाक़ी।
तन की सारी आग बुझाली,
मन की एक बुझानी बाक़ी।
सबको
समझा,बूझा,जाना,
अपनी
एक कहानी बाक़ी।
सीधे - सादे
इस जीवन में,
थोड़ी
सी शैतानी बाक़ी।
कहली, सुनली
बूझ इशारे,
थोड़ी बात ज़ुबानी बाक़ी।
4
जैसा
हूँ वैसा
दिखता हूँ।
महँगा हूँ सस्ता बिकता हूँ।
मुझसे
यूँ हैरान हैं सारे,
मैं
बातें सच्ची कहता हूँ।
फुल्का
हूँ मैं छींटों वाला,
तपते उपलों पर सिकता हूँ।
हूँ
मिट्टी के मटके जैसा,
तर उतना जितना रिसता हूँ।
गीत, ग़ज़ल,कविताओं में सब,
जीवन के मसले लिखता हूँ।
हाथों में है महक उसी की,
मैं
इनसे चंदन
घिसता हूँ।
5
चाँद से
तारों का पता पूछें।
यार
से यारों का
पता पूछें।
जान पहचान है भली उसके,
पास से
सारों का
पता पूछें।
आज यूँ रक्खें समझदारी हम,
मौज
से धारों का
पता पूछें।
चाह है जब यहाँ ठिकानों की,
पास दीवारों
का पता
पूछें।
और चीजों की हो खरीदी तो,
हाट ,बाजारों
का पता पूछें।
नवीन माथुर पंचोली
अमझेरा
धार मप्र 454441
मो 9893119724

