(आस्ट्रेलिया टीम का T- 20 विश्व कप-2026 से बाहर होने पर रचनाकार की शाब्दिक प्रतिक्रिया )
एक
बहेलिया स्वयं शिकार हो गया
लगता
गुजरे कल का विचार हो गया
मैदान
जिससे भय खाता था कभी
बेटिंग
बोलिंग में वो कुंद धार हो गया
कर्म
पीछा ना छोड़ता जानते हो
राह की
दिशाएं मोड़ता जानते हो
जीतकर
टाफी रखी पैरों के नीचे
दंभ पतन
का मित्र तुम जानते हो
बेताज
बादशाह मान बैठे स्वयं को
'बेताज' ही रहना होगा अब तुम्हें
टाफी
दिखेंगी नींद में ही सिर्फ अब
वो गलती
याद आयेंगी अब तुम्हें
बहुत
उछल कूद करते रहे मैदान में
छल कपट
अभिमान रहता मैदान में
आज
अवस्था हो गई तेरी निरीह सी
भीगी
बिल्ली से लग रहे हो मैदान में
- व्यग्र पाण्डे (कवि/लेखक)
कर्मचारी
कालोनी, गंगापुर
सिटी (राजस्थान)322201
E-mail: vishwambharvyagra@gmail.com

