ललन प्रसाद सिंह
सुबह लाने की जिद
बहुत धूंधलाई है यह शाम हमने बोया था वह भरोसा आज बस एक छाया है गली-गली में एक मौन एक सवाल घूम रहा …
बहुत धूंधलाई है यह शाम हमने बोया था वह भरोसा आज बस एक छाया है गली-गली में एक मौन एक सवाल घूम रहा …
कालचक्र की अनंत गति में कुछ क्षण ऐसे आते हैं , जो केवल तिथि परिवर्तन का माध्यम नहीं होते , बल्कि हमारी सामूहिक चेतना…