ठण्डी हवाएँ

अरुणिता
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ठंडी हवाएं थरथरी लाएं

महिना दिसंबर सबको, खूब लुभाएं

ओ हो...ठंडी हवाएं ...

 

खेतों ने ओढ़ा पीला दुपट्टा 

खेतों ने ओढ़ा पीला दुपट्टा 

धरती का दिखता प्यारा मुखौटा 

, बातें करें हैं सबसे चारों दिशाएं 

ठंडी हवाएं...

 

पेड़ों से टपके ओस की बूंदें 

पेड़ों से टपके ओस की बूंदें 

खड़े हैं पशु सब आंखें मूंदें

, कोहरे का आलम राह भुलाएं 

ठंडी हवाएं...

 

अलावों की मची है भरमार देखो 

अलावों की मची है भरमार देखो 

सूनी छतें बनी अब गुलजार देखो 

, गुनगुनी धूप हर तन को भाये 

ठंडी हवाएं...

 

          व्यग्र पाण्डे (कवि/लेखक)

कर्मचारी कालोनी, गंगापुर सिटी (राज.)322201

ई-मेल: vishwambharvyagra@gmail.com 


 

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