मेरी पहली कविता

अरुणिता
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कवि मन ये मेरा ना जाने क्या क्या लिखे

कभी प्रीत लिखे कभी रीत लिखे

कभी मित लिखे जीवन को संगीत लिखे

कभी सावन की बहार लिखे

कभी बरखा की फुहार लिखे

कवि मन ये मेरा जाने क्या क्या लिखे

प्रिय के दर्शन को आँखों का श्रंगार लिखे

कभी साजन का प्यार लिखे

तिखी सी तकरार लिखे

प्रितम की बांहों को गले का हार लिखे

कवि मन ये मेरा जाने क्या क्या लिखे

कभी आँखों की उत्सुकता लिखे

कभी करुण हृदय की व्यथा लिखे

कभी मन में उठी उमँग लिखे

जीवन में बिखरे ईंद्रधनुषी रंग लिखे

सदियों के से उतार चढ़ाव लिखे

कभी क्षण भर में अनंत सा ठहराव लिखे

कभी आशाओं का सागर

कभी फूलों पर चलते रक्त रंजीत पाँव लिखे

सुख दुःख को आती जाती लहरें और जीवन को तैरती नावं लिखें

कवि मन ये मेरा जानें क्या क्या लिखें.... 

 

रानी शर्मा 

धौलपुर बाड़ी 

 

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