ठण्ड

अरुणिता
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ठंड की दहलीज पर

कोहरे की दस्तक हो गई ।

निकली रजाई शान से
आग भी अब जल गई ।।

लिपटे है कम्बल मे
तब भी ठिठुरन हो रही ।
हो गया सर्दी जुखाम
नाक मेरी बह रही ।।

चाय का प्याला लिए
हाथ मेरे कापते
चाय की चुस्की लिया तो
सुडुक आवाज़ हो रही ।।

चाय की टपरी पर देखो
भीड़ कैसी लग रही ।
गर्म प्याली मागती
जनता बिचारी दिख रही ।।




उत्तम कुमार तिवारी " उत्तम "

लखनऊ

उत्तर प्रदेश

भारत

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