नव वर्ष तुम्हारा अभिनन्दन , सौरभमयी हो जैसे चन्दन।
हो सबके मन में उजियारा, नव वर्ष में बरसे सुख धारा,
तेरे आने पे सब खुश हों, जाये न भूख से कोई मारा।
जन जन में कभी न हो क्रंदन, नव वर्ष तुम्हारा अभिनंदन॥
अब करे न कोई घोटाला, आतंक पे लग जाये ताला,
सब दृढ निश्चय से तन्मय हों,हो राष्ट्रप्रेम का मतवाला।
करते धरती माँ का वन्दन,नव वर्ष तुम्हारा अभिनंदन॥
सब जग में हो भाईचारा, मन मंदिर में हो उजियारा।
सब लोग द्वेष से दूर रहें , नयनों में प्रेम की हो धारा।
बंजर बन जाये वन्दनवन, नव वर्ष तुम्हारा अभिनंदन॥
डॉ० केवलकृष्ण पाठक
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