सुनो

अरुणिता
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सुनो मुझे न तुमसे कुछ मांगना है

न ही तुमसे कुछ पाने की चाहत है

आज तुम ठीक तो हो न जिंदगी में 

सिर्फ यही तो छोटी सी ख्वाहिश थी 

 

उम्मीद की लौ में हुई ढलती सांझ है 

उदित सूर्य की रोशनी भी अपार है 

यूँ तो कहने को हजार शिकायत थीं 

कैसी है जिंदगी पूछने की खुमारी थी 

 

युगों से बहते अश्रुओं की एक कहानी है 

मिलन और जुदाई की बात तो पुरानी है  

प्रेम का वर्चस्व क्यों उम्मीदों की रवानी थी 

तुम खुश तो हो न बात सिर्फ ये सुननी थी 

 

खुशियों से जैसे न तेरा कोई वास्ता था 

तेरी मेरी जिंदगी का न कोई रास्ता था 

पैसों से खरीद ली होगी मनचाही खुशी 

आँखें बंद होने से पहले बात ये जाननी थी 


वर्षा वार्ष्णेय 

अलीगढ़, उत्तर प्रदेश  


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