सच का साल

अरुणिता
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नए साल में अब झूठ का ऐलान नहीं होगा,

नशे में डूबे लोगों का कोई सम्मान नहीं होगा।


होश में जीने वाले आगे बढ़कर कुछ तो करें,

बोतल वाले देवताओं का कोई पूजन नहीं होगा।


भ्रष्टाचार की जड़ पर कुल्हाड़ी ऐसे चले जैसे,

काग़ज़ी सच से फिर कोई पहचान नहीं होगा।


गरीबी से कह दो पागल, राज तेरा नहीं होगा,

भूखे बच्चे के हाथ में अब खाली थाल नहीं होगा।


मज़हब के नाम पर दुकान सजाने वालों का,

इन सौदागरों में अब रत्ती भर ईमान नहीं होगा।


त्योहार मनेंगे सब साथ ये एलान जरा कर दो,

ख़ून से सना कोई भी उत्सव महान नहीं होगा।


नया सूरज उगेगा तो जलेंगी  सारी सड़ी सोचें,

अँधेरों पर फिर किसी मोड़ पर ध्यान नहीं होगा।


नया साल गवाह है इस कड़वे संकल्प का साहब,

अब चुप रहना भी देशभक्ति का नाम नहीं होगा।



सोमेश देवांगन

गोपीबंद पारा पंडरिया

कबीरधाम(छ.ग.)


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