लाल -इश्क

अरुणिता
By -
0

 


 

तेरी अर्थी को कंधा देने के बाद,,

 मेरे महबूब बहुत अकेला हो गया

हूँ मै, तेरे शहर की ये खूबसूरत हवाएं

 मुझे तेरी याद दिलाती है मेरे दिल को

 सुकून नहीं लेने देती मेरे दिल के दर्द

के साथ रोज सुबह-सुबह खेल-खेलने

आती हैं,, तेरे शहर में तेरी यादों के साथ

 मेरे महबूब अब और जिंदा नहीं रह 

पाऊंगा मैं, तेरी यादों को अपने दिल में बसा कर

 तेरी इजाजत हो अगर मेरे दिल को,,

 तो, अपनी एक नई कहानी लिखना चाहूंगा मैं,,

 तू फिक्र मत कर मेरे महबूब ये वादा है मेरा

 तुझे कभी नहीं भूलूंगा मैं, अपनी अंतिम सांस तक

 तेरे साथ गुजारे हुए खूबसूरत पलों को,,

 अपने दिल की धड़कनों में,,

 छुपा कर रखूंगा मैं,, 

चल तेरे दिल की तसल्ली के लिए,,

 तुझे यकीन दिलाने के लिए,,

 गंगा पुत्र भीष्म की भांति,

 आज प्रतिज्ञा लेता हूँ मै,,

 एक तू ही मेरे दिल की महबूब है,,

 एक तू ही मेरे दिल की रानी है,,

 तू जो नहीं है इस जहां में, आज

तो, उम्र भर अपनी अंतिम सांस तक,

 मुझे कसम है तेरी मोहब्बत की,,

 किसी के हाथ में अपना हाथ नहीं दूंगा मै,,

 जब तक मेरे इस माटी के तन में,,

 लहू की एक बूंद भी बाकी है,,

 मैं जानता हूं ये परीक्षा है मेरी

 मुझे ये अपनी अखंड प्रेम प्रतिज्ञा निभानी है,,

 मेरा मेरी सांसों पर बस चलता

तो मेरा यकीन कर तू महबूब मेरी

 मैं अपनी सांसों को खुदा की झोली में डालकर

 तेरे साथ चलता तेरी चिता पर,

 तेरा हाथ थाम कर,,

 तू मुझसे अलग कहां है

रे, बावरी तू मेरी रगों में,

 लाल लहू के रूप में,

 लाल इश्क बनाकर समाई है !

 मेरी कहानी में तेरा नाम

 मुझे पहले आएगा

 मैं भी इंतजार में हूं

 तुझसे मिलने के लिए,

 ये मेरा दिल

 मेरा खुदा जानता हैं,,

 हमारे, लाल इश्क को,,

 मुकम्मल करने के लिए,,

 हमारी जुदाई का वक्त,,

 खुदा से भी न काटा जाएगा

 तू देखना मेरे महबूब

 कयामत के दिन,,

 खुदा की इश्क की किताब मे,

 मेरा और मेरे दिल की धड़कन

 तेरा नाम सबसे ऊपर लिखा जाएगा

 

आकाश शर्मा आज़ाद

आगरा उप्र

M 6396405065

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Out
Ok, Go it!