हे नववर्ष! तेरा स्वागत है,
नई आस ले अभ्यागत है,
करता है जग तेरा वन्दन,
नूतन वर्ष तेरा
अभिनन्दन।
नैराश्य छोड़ होगी नव
आशा,
नहीं दिखेगी कहीं निराशा,
हर सूं खुशियों का स्पंदन,
नूतन वर्ष तेरा
अभिनन्दन।
नई गज़ल नवगीत बनेंगे,
नवल साज संगीत
बनेंगे,
होगा नया सृजन
अभिव्यंजन,
नूतन वर्ष तेरा
अभिनन्दन।
दुनिया का अभ्युदय
होगा,
आज नवल सूर्योदय होगा,
भव में होगा सत्य सनन्दन,
नूतन वर्ष तेरा
अभिनन्दन।
नरेश चन्द्र उनियाल,
पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड।

