मेरी तस्वीर

अरुणिता
By -
0

 


जब भी मैं देखता हूँ,

मुस्कुराती हुई

अपनी तस्वीर को 

तब-तब वह मुझसे कहती है–

"तुम जो मुझमें मुस्कुरा रहे हो ना

वह तुम्हारी असली मुस्कान नहीं है

बनावटी है 

खोखली है

तुम 

मेरे द्वारा 

दूसरों को 

यह जताने की कोशिश में लगे हो 

कि मैं बहुत खुश हूँ"

 

और ऐसा कहते हुए 

मेरी बनावटी मुस्कान के पीछे 

हँसती है 

और मुझे मुँह चिढ़ाने लगती है 

 मेरी तस्वीर।

 

भाऊराव महंत

ग्राम बटरमारा, पोस्ट खारा 

जिला बालाघाट, मध्यप्रदेश

मो. 9407307482

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Out
Ok, Go it!