अच्छा सुनो
कभी नाराज हो तो
जब पंछी लौटे घर को
सूरज
थका हारा घर वापिस
आकर समुंदर की
गोद में सिर रखे
लौट आना तुम भी
कि कोई खड़ा है
देहरी पर
दीप लिए
तुम्हारे इंतज़ार
में
ये इंतज़ार बहुत
लंबा ना हो जाये
इस दिए के बुझने से
पहले
तुम अपनी आने की
पदचाप
सुना देना
मेरे लिए दुनियाँ की
कोई भी बात
उतनी जरूरी नहीं
जितना की तुम हो
तुम्हारा होना है
मेरा होना
और इस होने में
ये जरूरी भी नहीं कि
हमें
दुनियाँ के बाक़ी
रिश्ते छोड़ने पड़ें
तो तुम आ जाना
लेकिन तुम
इतना भी दूर मत जाना
कि हम
बिछड़ जाए
कुछ पसंद ना आए लड़
लेना
गुस्सा हो लेना
लेकिन खामोश मत हो
जाना
नहीं सही जाएगी मुझसे चुप्पी तुम्हारी
चुप हो जाना
ख़त्म कर देता है
रिश्तों को
इस लिए इस चुप्पी को
कभी भी
अपने मेरे बीच मत
आने देना
कुछ मत कहना मुख से
एहसासों से जता देना
कि तुम हो
अजनबीपन आने मत देना
आँखों में अपनी
सावित्री शर्मा “सवि
“
सावित्री शर्मा” सवि
“
३७/३ ,इनकम टेक्स लेन
सुभाष रोड ,देहरादून
उत्तराखंड
पिन 248001
Ph 9412006465

