क्रांति हूं मैं

अरुणिता
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क्रांति हूं मैं क्रांति हूं

अशांति पर मैं क्रांति हूं

अन्याय पर मैं क्रांति हूं

अत्याचार पर मैं क्रांति हूं

 

भूखों की भूख मिटाने के लिए

मजदूरों की रोजी रोटी के लिए

जरूरतमंदों की मदद  के लिए

क्राति हूं मैं क्रांति हूं

 

सोए हुए जनों को जगाती हूं

हक मांगने वालों को हुंकारती हूं

विष के प्याले को अमृत बनाती हूं

प्यार की बहुत बौछार करती हूं मैं

क्रांति हूं ,मैं क्रांति हूं

 

लाठी, गोली की बदनीयती पर

हिंसा और तानाशाही पर

नफरतों की आंधियों पर

बेइंतहा कहर बरपाती हूं मैं

क्रांति हूं, मैं क्रांति हूं

 

आजादी के दीवानों की प्यारी हूं मैं

सुभाष, भगत सिंह की कहानी हूं मैं

वीर सैनिकों की  सुंदर  रवानी हूं मैं

मातृभूमि की चौकस निगहबानी हूं मैं

क्रांति हूं मैं, क्रांति हूं मैं

 

लोकतंत्र, संविधान की मैं रक्षिका हूं

देशद्रोहियों की मैं भक्षिका हूं

सृजनहारों की मैं कृतिका हूं

मानव धर्म की मैं संस्थापिका हूं

क्रांति हूं मैं, क्रांति हूं मैं

 

दुर्गा और काली मेरी माता

मन उनकी ही महिमा गाता

अपार शौर्य का बखान करता

दुर्गा मां की तरह दानवों का

संहार करती हूं मैं

क्रांति हूं ,मैं क्रांति हूं मैं

 

जनपक्षधर कवियों को ही सुहाती

सच्चे इंसानों को बहुत मैं भाती

हमेशा इंसानियत को गले लगाती

अमानवीयता पर निरंतर प्रहार

करती हूं मैं

क्रांति हूं ,मैं क्रांति हूं

प्रमोद झा

मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश 

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