डागळे चढ़ बैठ्यो तावड़ो

अरुणिता
By -
0

खेतां री रुखवाळी करतां 

डागळे चढ़ बैठ्यो तावड़ो ।

फूलां सूं लदग्यो आकड़ो ।

 

छौड़ो आज री अबै 

करां तो काळ री बातां ।

नींदां सूं सगळी 

उधड़ी-उधड़ी हो गई रातां ।

 

दुःख रो तो राजपथ चौडो 

सुख रो गैळो घणों सांकड़ो ।

डागळे चढ़ बैठ्यो तावड़ो ।

 

थारी-म्हारी करता-करता

कटगी उमर सारी ।

कदै चासणी मीठी तो

कदै वा लागी खारी ।

 

म्है तो थाक्यो तौक-तौक’र 

गैळा माय बिछ्यो लाकड़ो ।

डागळे चढ़ बैठ्यो तावड़ो ।

 

दन तो बौदा बीतरैया 

बगत री हैरा फैरी ।

मन यो बावळो

फेरू आस बंधारयो बैरी ।

 

करिया घणा ही जतन जाप्ता

देव-देवरा रोयौ दुखडो ।

डागळे चढ़ बैठ्यो तावड़ो ।

 

प्यारचन्द शर्मा 'साथी'

3 55 न्यू हाउसिंग बोर्ड

शास्त्री नगर भीलवाड़ा राजस्थान

मो 9468608462

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Out
Ok, Go it!