एक उत्सव
समय का
परिधान बदल
आंगन में आया है।
स्थिर है कैनवास
रंग चुपचाप बदलते
हैं
उपवनों का स्पंदन
वही
केवल खुशबू मचलते
हैं।
माधुर्य रागों से यहां
गीत किसने गाया है
संतापों की तपन नहीं
अब शीतलता की छुअन है
मन जैसे कोई परिंदा
उड़ने को
विशाल गगन है
भोर की नई किरणों ने
इत्र का फाहा लगाया
है।
पंखुड़ियों पर अब
शबनमी अभिनंदन है
मुस्कानों के बदन से
झरता अब चंदन है।
शुचितर संबंधों का
सूरज
सौगात यहां लाया है।
गुलाबी झरोखों से
झांकती
अभी है रोशनी मुलायम
मुट्ठी से फिसलती रेत भी
अपनी बात पर कायम
वक्त ने बांधी गांठ, जो
यहां कौन खोल पाया
है।
एक उत्सव
समय का
परिधान बदल
आंगन में आया है ।।
सतीश उपाध्याय
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मार्ग
कृष्ण-कुटी
वार्ड नंबर - 10,
अग्रवाल लाज के पास
मनेंद्रगढ़ जिला - एम.सी.बी
छत्तीसगढ़
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