चांदनी रात में
अक्सर
बहुत तुम याद आते
हो।
शीशे में निहारती
हूं
मगर तुम नजर न आते
हो।
मेरे दिल को आखिर
क्यों
तुम इतना दुखाते हो।
मेरी आंखों की नींदे
तुम क्यों चुराते हो
।
बुलाती हूं तुम्हें
छत पर
पर तुम न आते हो ।
बतओ आखिर तुम हमको
इतना क्यों तड़पाते
हो।
मोहब्बत की कसम
तुमको
बेवफाई क्यों दिखाते
हो।
तेरा मैं इंतजार
करती हूं
पर तुम न आते हो ।
अगर मिलना नहीं है
तो
बहाने क्यों बनाते
हो।
मुझे बतला दो तुम सच
सच
इतना क्यों तरसाते
हो।
बद्री प्रसाद वर्मा
अनजान
गल्ला मंडी
गोलाबाजार 273408
गोरखपुर उ. प्र.
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