आज का सत्य
खेत तब्दील हो रहे
माॅल, औद्योगिक प्रांगण
में
आँगन बाजार में
आज का सत्य
नदी का पानी
जो फसल उगाने के काम
आता था
उसे बांध बना रोक
दिया पहाड़ों पर
आज का सत्य
बालू की नदी
गांव के पास से गुजर
रही
जिसके पेट में
कंक्रीट के जंगल उग आये हैं
आज का सत्य
नदियां चुप हैं,जंगल चुप हैं
पहाड़ दरक रहे
विकास की चाल टेढ़ी
है
आज का सत्य
झूठ में सना कराह
रहा
एक कोने में दुबक
अपनी अस्तित्व के
रक्षा के लिए।
कनक किशोर
राँची, झारखंड
चलभाष - 9279200401

