शब्द शाश्वत हैं

अरुणिता
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समीक्षक- योगेश कुमार दुबे 

70, पत्रकार कालोनी, इन्दौर (.प्र.)

दूरभाष: 9329556748

 

(मानवता और दर्शन की अद्भुत काव्य यात्रा -"शब्द शाश्वत हैं')

 

समीक्ष्य पुस्तक में रचनाकार ने अपनी साहित्यिक प्रतिभा से अपनी भावनाओं को रखने का प्रयास किया है। कवि सकारात्मकता के साथ नई सोच की कल्पना करता है। इस संदर्भ में अल्बर्ट आइंस्टीन का कथन याद आता है "कल्पना ज्ञान से अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि नवाचार का जन्म कल्पना से ही होता है।" साहित्यिक कल्पना की सुंदर प्रस्तुति काव्य यात्रा को "शब्द शाश्वत हैं "के रूप में साकार कर रही है।

          बाल रोग चिकित्सक डॉ.अखिलेश शर्मा ने अपने प्रथम काव्य संग्रह में शामिल कविता 'शब्द और पंचतत्व' में अपने शब्दों को पंचतत्व में समाहित कर शब्दों  को जीवन देकर शरीर और आत्मा  की व्याख्या को जन्म दिया है, जो काबिले तारीफ है ।काव्य संग्रह में  कलम की ताकत का उल्लेख भी है इसी कारण कवि शाश्वत रूप में परिलक्षित है।सूरज को  विधाता से बड़ा बताकर उसके अस्तित्व को एक कविता में उसके जलने के प्रति समर्पण भाव की अभिव्यक्ति स्तुत्य है।

        भूख, शांति, युद्ध, भाईचारे व प्यास की चिंता कर एक चिकित्सक 'बहा दो प्रेम की नदियां 'के माध्यम से अपनी संवेदनाओं को व्यक्त करता है, और आशान्वित हैं कि हर पथ के मुसाफिर को यदि राह दिखाई जाए तो वह भटक नहीं सकता। 

         वर्तमान समय में आदमी अपने स्वार्थ के कारण इतना गिर चुका है कि वह अपनों के खून से होली  खेलने और  धर्म के नाम पर ठेकेदार बना बैठा है ।आदमी के चेहरे को पाठकों के सामने उनकी एक कविता 'आदमी'' ला रही है ।'खिलौने और गड़ियाकविता मे पुराने खिलौने की जगह पर आधुनिक खिलौने के दर्शन और 'कैसी गुड़ियाएं हैं?' में वर्तमान दौर के सबसे दुखद और चुनौतीपूर्ण परिदृश्य पर कलम ने समाज से प्रश्न किया है। मासूम बच्चियों की  व्यथा को कवि ने पाठक के हृदय को झकझोर दिया है।

          बेटी दोनों कुलों को रक्षित कर एक पुल बनाकर दो परिवारों के मिलन का सुखद मार्ग बनाती है, इसीलिए दोनों  कुलों की शान है,यह उनकी 'बेटी' कविता कहती है।

     'कलम की ताकत' मे नैतिक साहस को बढ़ाने की दिशा में कलम के योगदान से समाज के लोगों को  जागरूक करती कविता आज के डिजिटल समय में लिखने के महत्व का दर्शन प्रकट करती है।

     ईमानदारी से निभाने और सड़क पर लड़की की चीख को  दरिंदों से मुक्त कराने के भाव के साथ एकता की मिसाल व गांव के चौपालों को पहले जैसा सजाने की कल्पना काबिले तारीफ है।

   संस्कार के माध्यम से संस्कारविहीन   आजकी  पीढ़ी पर कवि हृदय की चिंता समझी जा सकती है। संस्कारवान होना लड़कियों के साथ लड़कों को भी जरूरी है तभी समाज में समरूपता आ सकती है।                  

     'जिंदगी के सार' में प्यार की सुंदर अभिव्यक्ति का दर्शन है।आज के दौर में प्रेम  की ही आवश्यकता है। जब स्नेह के बंधन अटूट होंगे तो हृदय में अपने आप ही चारों धाम के दर्शन होंगे ।

     हनुमान चालीसा को  हाइकु में लिखना अपने आप में एक उपलब्धि है।

   अपनी कविता की शतक पुस्तक में पूर्ण करने के बाद   कवि ने अपने  इन्दौर को एक सशक्त शहर के  रूप में स्थापित होने की  कल्पना की है।

   सभी कविताएं रोचक सीधी और सरल भाषा में होने से मानस पटल पर छाप छोड़ती हैं।

   बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सक ने शरीर के तापमान को देखते हुए कविताओं का सृजन किया है,जो शारीरिक पीड़ा और  आत्मा की अनुभूति को उर्जा और रोशनी प्रदान करतीं हैं।

 

समीक्षित कृति: शब्द शाश्वत हैं 

लेखक: डॉ अखिलेश शर्मा 

प्रकाशक: संस्मय प्रकाशन, नई दिल्ली 

मूल्य:375 रूपए 

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