गीत बजते रहे अब तुम्हारे लिए ।
चूडियो की बीणा बजने लगी
गीत गाता रहा अब तुम्हारे लिए ।।
है उनीदी ये पलकें तुम्हारे लिए
हिय प्रेम सतत अब तुम्हारे लिए ।
रति विभावरी अब मचलने लगी
सेज सजने लगी अब तुम्हारे लिए ।।
दीप जलने लगे अब तुम्हारे लिए
फूल भी ये महकते तुम्हारे लिए ।
रात रानी भी खिलने लगी रात मे
बात होने लगी अब तुम्हारे लिए ।।
रात सोया नहीं मै तुम्हारे लिए
स्वप्न सुन्दर दिखे अब तुम्हारे लिए ।
चांदनी चाँद को यू देखती ही रही
रात सोने गई अब तुम्हारे लिए ।।
जश्न होने लगा अब तुम्हारे लिए
लोग आने लगे अब तुम्हारे लिए ।
बन कर सहचर तुम आओ मेरे पास मे
पास बैठो तुम आकर हमारे लिए ।।
उत्तम कुमार तिवारी 'उत्तम'
३६१ " का पुराना टिकैत
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