तुम्हारे लिए

अरुणिता
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 रात सजती रही अब तुम्हारे लिए 

गीत बजते रहे अब तुम्हारे लिए ।

चूडियो की बीणा बजने लगी 

गीत गाता रहा अब तुम्हारे लिए ।।

 

है उनीदी ये पलकें तुम्हारे लिए 

हिय प्रेम सतत अब तुम्हारे लिए ।

रति विभावरी अब मचलने लगी 

सेज सजने लगी अब तुम्हारे लिए ।।

 

दीप जलने लगे अब तुम्हारे लिए 

फूल भी ये महकते तुम्हारे लिए ।

रात रानी भी खिलने लगी रात मे 

बात होने लगी अब तुम्हारे लिए ।।

 

रात सोया नहीं मै तुम्हारे लिए 

स्वप्न सुन्दर दिखे अब तुम्हारे लिए ।

चांदनी चाँद को यू देखती ही रही 

रात सोने गई अब तुम्हारे लिए ।।

 

जश्न होने लगा अब तुम्हारे लिए 

लोग आने लगे अब तुम्हारे लिए ।

बन कर सहचर तुम आओ मेरे पास मे 

पास बैठो तुम आकर हमारे लिए ।।

 

उत्तम कुमार तिवारी 'उत्तम'

३६१ " का पुराना टिकैत गंज
लखनऊ- २२६०१७
सम्पर्क सूत्र :- 7452015444

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