बच्चे हर माता-पिता के जीवन का सबसे अनमोल उपहार होते हैं। वे केवल हमारे घर की रौनक नहीं, बल्कि हमारे जीवन का सच्चा आधार भी हैं। जब जीवन की भागदौड़ में हम थक जाते हैं, तब बच्चों की मुस्कान हमें नई ऊर्जा से भर देती है। उनकी हँसी, मासूम सवाल और सच्चे भाव हमारे दिल को छू जाते हैं।
मेरे बच्चे मेरे लिए केवल मेरे संतान नहीं, बल्कि मेरे सच्चे मित्र हैं। उनके साथ मैं अपनी बातें खुलकर साझा कर सकती हूँ — चाहे वह मेरी खुशी हो, चिंता हो या कोई छोटी सी बात। वे कभी न्याय नहीं करते, बस सुनते हैं, समझते हैं और अपने भोलेपन से मुस्कुरा देते हैं। यही मुस्कान मेरे जीवन की सबसे बड़ी ताकत है।
जब मैं उदास होती हूँ, वे बिना कहे मेरे पास आकर बैठ जाते हैं, कभी गले लग जाते हैं, कभी छोटी-सी शरारत कर हँसा देते हैं। उनके भीतर छिपी निष्कपट भावना और निःस्वार्थ प्रेम मुझे यह एहसास कराता है कि सच्ची मित्रता उम्र या समझ की नहीं, बल्कि दिल की होती है।
मेरे बच्चे मुझे जीवन के कई बड़े सबक भी सिखाते हैं। वे बताते हैं कि खुशी छोटी-छोटी चीज़ों में होती है — कभी एक गुब्बारे में, कभी बारिश की बूंदों में, तो कभी एक कहानी सुनाने में। वे यह सिखाते हैं कि जीवन को ज्यादा गंभीर नहीं बनाना चाहिए; थोड़ा खेलना, मुस्कुराना और प्यार बाँटना जरूरी है।
बच्चे हमारे सबसे ईमानदार साथी होते हैं। वे हमें बिना शर्त अपनाते हैं, हमारे दोष नहीं देखते, बस प्रेम से भर देते हैं। जब वे गलती करते हैं, तब हम उन्हें सिखाते हैं; और जब हम खुद गलत होते हैं, तो वे अपनी मासूम मुस्कान से हमें माफ कर देते हैं। यह रिश्ता मित्रता, ममता और अपनापन का सुंदर संगम है।
मेरे बच्चे मेरे दिन की शुरुआत की मुस्कान हैं और रात के सुकून का कारण। उनके बिना जीवन अधूरा और नीरस लगता है। वे मेरे लिए केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मेरे जीवन का आनंद, मेरी प्रेरणा और मेरे सच्चे मित्र हैं।
सच्चा मित्र वही होता है जो हर परिस्थिति में साथ दे, हमें समझे और बिना स्वार्थ के प्रेम करे। मेरे बच्चे मेरे ऐसे ही सच्चे मित्र हैं — जो मेरे जीवन में खुशियों के रंग भरते हैं और मुझे हर दिन जीना सिखाते हैं।
सिन्धु मिश्रा,
रांची,झारखंड,भारत

