वी0 पी0 दिलेन्द्र
अमलतास
ला कालेज की सीढियों पर बैठ मैं देख रहा खिलते अमलतास को भीषण गर्मी में खिल गया है पीताम्बर हो गया है आंखों क…
ला कालेज की सीढियों पर बैठ मैं देख रहा खिलते अमलतास को भीषण गर्मी में खिल गया है पीताम्बर हो गया है आंखों क…
आज का सत्य खेत तब्दील हो रहे माॅल , औद्योगिक प्रांगण में आँगन बाजार में आज का सत्य नदी का पानी जो फसल…
मैं भीड़ के पीछे भागती रही , भागती रही झूठ और फ़रेब के पीछे। सबने मुझे शाबाशी दी , रोका किसी ने भी नहीं। मुझे दौ…
अच्छा सुनो कभी नाराज हो तो जब पंछी लौटे घर को सूरज थका हारा घर वापिस आकर समुंदर की गोद में सिर रखे…