पद्मश्री दादा श्री कैलाश चंद्र पंत

अरुणिता
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  नैतिकता के मानदण्डों द्वारा अविरल अनुष्ठान के अखंड 

  सेतु निर्माण में सिद्धहस्त : पद्मश्री दादा श्री कैलाश चंद्र पंत

     " पद्मश्री दादा श्री कैलाश चंद्र पंत जी के प्रति आम जनमानस सदा से ही आभार युक्त कृतज्ञता के स्वरूप में ऋणी रहा है , क्योंकि उन्होंने दीर्घकालीन साहित्यिक साधना , शिक्षा एवं पत्रकारिता के व्यापक परिदृश्य द्वारा आचरण के आचार्य स्वरुप में सामाजिक परिवेश को सकारात्मक दृष्टि एवं सार्थक दृष्टिकोण प्रदान करने में स्वयं की सलंग्नता को अनवरत अर्थात अविरल स्वरूप में नित - नूतन आधारभूत स्थितियों  द्वारा - श्रेष्ठ , शुभ एवं पवित्र संकल्पनाओं को सदा से ही मानवीय संवेदनशीलता के संदर्भित प्रसंग में स्थापित किया है जिससे मानवीय अंत:करण को सबल और सक्षम बनाया जा सके , आवश्यकता है अंतरमन से इन मूल्यपरक सिद्धांतों से जुड़े हुए व्यावहारिक समाधान को अनुकरण एवं अनुसरण के माध्यम से आत्मसात करके , आत्म जगत की चैतन्यता को जागृति  की प्रासंगिकता से संबद्ध करते हुए स्वयं को गतिशीलता प्रदान करने की , जिससे अधिकार और कर्तव्य के मध्य श्रेष्ठतम सामंजस्य स्थापित करते हुए कर्तव्यनिष्ठ अवस्था की ओर प्रस्थान किया जाना सुनिश्चित हो जाए ।"

01 - बहुमुखी प्रतिभा संपन्न व्यक्तित्व का राष्ट्र धर्म : -

        पद्मश्री परम आदरणीय दादा श्री कैलाश चंद्र पंत जी , भारतीय आत्मा की उज्जवल पृष्ठभूमि का उद्घोष करते हुए जब जीवन का आरंभिक परिवेश गढ़ने का भगीरथ प्रयास अंतरमन की जिजीविषा द्वारा जतन करते हुए पूर्णता प्रदान करते हैं तब निश्चित ही उनके मानस का चिंतनशील पक्ष - भाव ,भासना , भावना एवं भाषा की पवित्रता के माध्यम से संपूर्ण समर्पण से सर्वगुण संपन्नता की ओर सहज ही अभिमुखित हो जाता है जो परिपक्व अवस्था में - ' व्यक्ति एक के स्वरूप में बहुमुखी प्रतिभा संपन्न व्यक्तित्व अनेक ' का सौंदर्य बोध - ' राष्ट्र धर्म ' के निर्वहन के अंतर्गत राष्ट्रभाषा हिंदी के उत्थान , उन्नयन एवं उत्सर्ग के संदर्भित प्रसंग में सामाजिक उपयोगिता के माध्यम से सर्व मानव आत्माओं को आत्मीयता की बोधगम्यता से साक्षात्कार कराने में सक्षम होता है जिसमें आत्म उत्थान से सर्व मानव आत्माओं का कल्याण सुनिश्चित हो जाता है

  02 - नैतिकता के मानदंडों द्वारा अविरल अखंड अनुष्ठान : -

      चार पीढियों के मध्य आदर्श जीवन की परिकल्पना का सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक पक्ष जब जीवन के आदर्श को पारिवारिक एवं सामाजिक यथार्थ के अंतर्गत इस प्रकार से राष्ट्रीय हितों के संदर्भित प्रसंग में प्रतिपादित करता है कि - नैतिकता के मानदंडों द्वारा अविरल अनुष्ठान के अखंड सेतु निर्माण में सिद्धहस्त महामानव पद्मश्री दादा श्री कैलाश चंद्र पंत जी की भूमिका संपूर्ण रूप से एक साधक को सिद्धि स्वरूप प्रदान कर देने में सक्षम हो जाती है जिसके अंतर्गत एक चिंतक , विचारक , विद्वान मनीषी की निष्पक्षता ही उनकी वास्तविक पूंजी बन जाती है जो अन्तत: उन्हें साहित्यिक , शैक्षणिक एवं सृजनात्मक पत्रकारिता जगत में आधारमूर्त अधिष्ठाता के रूप में गढ़ देती है ।

 03 - धर्मगत आचरण के आचार्य का विराटतम स्वरूप  : -

        सामाजिक परिवर्तन के प्रति सकारात्मक दृष्टि और सार्थक दृष्टिकोण से उपजती मन:स्थितियां , शैक्षणिक अवस्थाओं से गुजरते हुए विद्वतापूर्ण अर्थात समाधानमूलक बौद्धिक विमर्श के संदर्भित प्रसंग में मूल्यपरक सिद्धांत को व्यावहारिकता की कसौटी पर दर्शनिकता की बोधगम्यता द्वारा - निमित्त , निर्माण , निर्मल एवं निर्वाण की गति को जन्म देने में संपूर्ण रूप से सहायक हो जाती हैं जिसमें - ' धर्मगत आचरण के आचार्य ' का विराटतम स्वरूप विद्यमान रहता है जो मानवीय संवेदनशीलता को धिकारिक तौर पर सम्मान देने के नवीनतम मानदण्ड स्थापित कर देता है जिससे आध्यात्मिक चेतना की चैतन्यता , आत्मा की सुचिता को ,जीवन में अनायास स्वरूप में ही उत्पन्न हो जाने वाली विभिन्न प्रकार की स्थितियों एवं विविध विरोधाभासी परिस्थितियों में भी बनाए रखने में सक्षम हो जाती है , इसका प्रत्यक्ष प्रमाण जीवित किंवदन्ती के रूप में हम सभी के सम्मुख पद्मश्री दादा श्री कैलाश चंद्र पंत जी आज भी ' चैतन्यता स्वरूप ' में विद्यमान हैं ।

04 - चेतनागत चैतन्यता से चिंतन की नवाचारी प्रणाली  : -

        जीवन में स्वयं की स्वतंत्रता की उद्घोषणा , सृजनात्मक क्रियाविधियों के द्वारा जिसमें , प्रमुख रूप से पठन - पाठन , मनन - चिंतन  , लेखन - विश्लेषण तथा मर्यादित - संप्रेषण की उच्चतम स्थितियों द्वारा सामाजिक स्वीकारोक्ति का यथार्थ बोध - प्रतिपुष्टि , के माध्यम से प्रतिफलित होने के पश्चात स्वयं को स्वतंत्रता के सात्विक सानिध्य में सार्वजनिक जीवन में पूर्ण रूपेण स्वतंत्र कर देना , निजता की सक्षमता अर्थात आत्मबल का प्रामाणिक प्रबोधन होता है जिसमें शासकीय सेवा के दबाव से पूर्णतया मुक्ति अर्थात बंधनों की जकड़न से अस्तित्व खोते संबंधों को सुरक्षित एवं संरक्षित करने हेतु - ' जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ... ' के प्रति नैसर्गिक रूप से सेवा भाव का व्यावहारिक परिदृश्य अंतःकरण में गौरवान्वित होते हुए चेतनागत , चैतन्यता से चिंतन की नवाचारी प्रणाली में - धारा प्रवाह की वैचारिक गतिशीलता द्वारा मानवता के उत्थान हेतु बहुआयामी स्वरूप में कल्याणकारी एवं मंगलकारी , पक्षधरता के निर्माण के साथ ही  ' राष्ट्रधर्म ' का निर्वहन करते हुए - ' जनधर्म ' का सृजनात्मक स्वरूप जनमानस के सम्मुख निष्पक्षता की सत्य निष्ठा द्वारा अंततः प्रतिपादित हो ही जाता है ।

 05 - दीर्घकालीन साहित्य साधना के उपलब्धिपूर्ण परिणाम  : -

       पत्रकारिता के निहितार्थ से उपजते न्यायपूर्ण सवाल का उत्कृष्टता से युक्त जिम्मेदारी एवं जवाबदेपूर्ण - प्रतिउत्तर का प्रस्फुटित स्वरूप जब अतीत , आगत और अनंत के संदर्भों में मूल्यांकन की स्थितियों से गुजरता है तब वहां साहित्यिक गतिविधियों की उत्कृष्टता का आलोकित स्वरूप सर्व मानव आत्माओं को अत्यंत सहजता से ही आत्मिक स्वरूप के साथ - साथ हृदय की गहराई से भी स्पर्श कर लेता है जिसमें साहित्य के प्रति आत्म जगत की निष्ठा को प्रतिबिंबित करते हुए इस तथ्य एवं सत्य को स्थापित किया जाता है जिसके अंतर्गत - ' साहित्य ' ही भाषा का प्राण होता है ' इस उक्ति को अक्षरश: स्वरूप में - ' अक्षरा ' की अनवरत साहित्यिक यात्रा के द्वारा प्रादेशिक , राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के अंतर्गत अर्थात जगत के सम्मुख गर्व और गौरव के सानिध्य में प्रतिपादित कर देता है जिसे पद्मश्री दादा श्री कैलाश चंद्र पंत जी के दीर्घकालीन साहित्य सेवा - साधना के उपलब्धिपूर्ण सुखद परिणाम स्वरूप - ' विश्वसनीयता के मानदंडों पर खरी उतरती पत्रकारिता ' के जीते - जागते स्वरूप में वृहद अंतरमन से संपूर्ण जनमानस की स्वीकृति द्वारा सहज ही , जीवन के सुखांत के रूप में आज भी निरंतर अनुभव किया जा रहा है

06 - भारतीय आत्मा की उज्जवल पृष्ठभूमि का जयघोष : -

        आत्म जगत के केंद्रीय भाव का विश्लेषणात्मक अध्ययन करने पर यह पूर्णतया स्पष्ट हो जाता है कि भारतीयता की उज्जवल पृष्ठभूमि के जयघोष में दार्शनिकता की बोधगम्यता से युक्त महामानव की भूमिका में - दादा श्री कैलाश चंद्र पंत जी , मूर्धन्य साहित्यकार , लेखक , चिंतक , विचारक और स्वतंत्र स्वरूप में पत्रकार रहते हुए , हिंदी भाषा के अघोषित समर्थक के रुप में अपनी विशिष्ट भूमिका का निर्वहन करने में सदा संलग्न हैं तथा मध्य प्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति में महासचिव के पद रहते हुए संपूर्ण राष्ट्र में चर्चित - प्रतिष्ठित हिंदी साहित्यकार , वरिष्ठ पत्रकार , उच्च कोटि के चिंतनशील स्वरूप में समर्पित हिंदी सेवक हैं जिन्हें उनके महानतम साहित्यिक अवदान के लिए हिंदी राष्ट्रभाषा , पत्रकारिता के क्षेत्र में स्वतंत्र प्रेस की स्थापना और शिक्षा के क्षेत्र में उनके संपूर्ण अर्थात जीवन पर्यंत साहित्य साधना द्वारा अमूल्य योगदान के लिए उन्हें -  वर्ष - 2026 , में भारत सरकार द्वारा गरिमामयी  - ' पद्मश्री ' पुरस्कार से सम्मानित किया गया है 

07 - संपूर्ण समर्पण से सर्वगुण संपन्नता की ओर : -   

        हिंदी भवन भोपाल में पद्मश्री दादा श्री कैलाश चंद्र पंत जी ने स्वयं के जीवन को संपूर्ण समर्पित स्वरूप अर्थात तन , मन और समय रूपी धन से सुप्रसिद्ध संस्था - ' मध्य प्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति , के अंतर्गत राष्ट्रभाषा हिंदी के विकास एवं संवर्धन हेतु दीर्घकालीन अवधि तक अति विशिष्ट पदों पर विराजमान रहकर हिंदी भाषा के प्रचार - प्रसार में संपूर्ण जतन के साथ ,अंतरात्मा द्वारा अनवरत रूप से जुटे रहे हैं तथा राष्ट्रभाषा हिंदी के आजीवन समर्थक के स्वरूप में उन्होंने हिंदी को केवल एक साहित्यिक भाषा ही नहीं अपितु राष्ट्रीय सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक और प्रतिबिंब के स्वरूप में स्थापित करने के लिए कई दशकों तक संपूर्ण आत्म जगत की शक्ति के साथ धरातल पर रहकर पूर्ण रूपेण जमीनी स्तर पर साहित्य साधना का कार्य संपन्न किया है तथा वे एक अनुभवी लेखक ,वरिष्ठ संपादक और कुशल संस्था निर्माता और निर्बाध संचालक के रूप में जाने पहचाने जाते हैं

08 - व्यक्ति एक बहुमुखी प्रतिभा संपन्न व्यक्तित्व अनेक : -

         दादा श्री कैलाश चंद्र पंत जी का जन्म 26 अप्रैल 1936 को हुआ था तथा उन्हें  पद्मश्री सम्मान - 2026 -  श्रेणी अर्थात उन्हें - ' साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान ' के लिए चयनित किया गया , भारत की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी द्वारा उन्हें राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में यह सम्मान प्रदान किया गया , पद्मश्री दादा श्री कैलाश चंद्र पंत जी ने भारत के प्रतिष्ठित सम्मान मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा था कि - " यह पुरस्कार न केवल उनके लिए , बल्कि शिक्षा और हिंदी साहित्य साधना से जुड़े हर व्यक्ति के लिए गर्व की बात है " दादा पंत जी , जो मुख्य रूप से भोपाल , मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं राष्ट्र के उत्सर्ग हेतु स्वयं के बलिदान और दृढ़ संकल्प की पवित्रता को अक्षुण्य बनाए रखने के लिए उन्होंने हिंदी साहित्य और स्वतंत्र पत्रकारिता के प्रति अपने समर्पित भाव जगत और साहित्यिक योगदान के लिए - स्वतंत्र प्रेस और जनधर्म के कारण ही सरकारी नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने अपना एक स्वतंत्र प्रेस स्थापित किया और  - ' जनधर्म ' नामक साप्ताहिक पत्र , निष्पक्षता एवं सत्यता की पृष्ठभूमि में - लोक कल्याण हेतु निकालना आरंभ कर दिया

09 - पत्रकारिता के निहितार्थ से उपजते न्यायपूर्ण सवाल : -

           पत्रकारिता जगत में साप्ताहिक पत्र - ' जनधर्म ' का शुभारंभ , पद्मश्री दादा श्री कैलाश चंद्र पंत जी ने हिंदी पत्रकारिता को एक नई दिशा प्रदान करने के लिए , सरकारी नौकरी का संपूर्ण रूप से त्याग कर दिया था ताकि स्वतंत्र रूप से विचारगत पत्रकारिता को एक नया स्वरूप प्रदान किया जा सके ततपश्चात स्वतंत्र पत्रकारिता के मार्ग को उन्होंने स्वयं की इच्छा शक्ति से चयनित किया और निजी स्तर पर स्वतंत्र प्रेस भी स्थापित कर दिया , जिसके महत्वपूर्ण उद्देश्य की पूर्णता हेतु - इस प्रेस के माध्यम से उन्होंने ' जनधर्म ' नामक साप्ताहिक पत्र का संपादन और प्रकाशन आरंभ कर दिया जिसकी महत्ता को प्रतिपादित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया था कि - यह साप्ताहिक - ' धर्म '  केवल एक समाचार पत्र नहीं , बल्कि यह हिंदी भाषा के उन्नयन हेतु इसके  प्रचार - प्रसार के साथ ही सामाजिक चेतना और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को आमजन तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम भी बन गया

10 - राष्ट्रधर्म के निर्वहन हेतु जनर्म का प्रकाशन  : - 

       मध्यप्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के महासचिव के रूप आपकी सेवाओं को सदा ही सम्मान प्रदान किया जाता रहेगा क्योंकि राष्ट्रभाषा हिंदी के विकास के लिए आपने अति महत्वपूर्ण योगदान दिया है यह संस्था हिंदी के विकास में अहम भूमिका निभाती है पद्मश्री दादा श्री कैलाश चंद्र पंत जी ने साहित्य और शिक्षा के साथ - साथ राष्ट्रभाषा हिंदी , पत्रकारिता और राष्ट्रभाषा के प्रचार - प्रसार तथा संपादन में प्रकाशित होने वाली , कई मुख्य पत्रिकाएं और समाचार पत्र आपने संपादन और पत्रकारिता के क्षेत्र में कई दशकों तक साहित्यिक अवदान के स्वरूप में सक्रिय भूमिका निभाई है , राष्ट्रधर्म के उपलब्धिपूर्ण कुशलतम स्वरूप में निर्वहन हेतु जनधर्म के प्रकाशन की जिम्मेदारी और जवाबदेही की सुखद परिणित -  ' जनधर्म ' साप्ताहिक पत्र का विराटतम स्वरूप में संपादन और प्रकाशन की विधिवत रूप में संपन्नता से जुड़ी हुई आत्मिक संतुष्टता , यह आपके जीवन का सबसे बड़ा स्वतंत्र प्रयास था और 22 वर्षों तक इस हिंदी साप्ताहिक पत्र का नियमित संपादन एवं प्रकाशन , आपके द्वारा सफलतापूर्ण स्वरूप में संपन्न किया गया

11 - विश्वसनीयता के मानदंडों पर खरी उतरती पत्रकारिता : -

    ' अक्षरा ' के संपादकीय पृष्ठ पर पद्मश्री दादा श्री कैलाश चंद्र पंत जी के संपादकीय आलेखों का पाठक वर्ग में सदा अंतरमन से उमंग उत्साह के साथ ही  , प्रतीक्षा बनी रहती थी कि कब - ' अक्षरा ' का नवीनतम अंक हस्तगत हो जाये और संपूर्ण मनोयोग से पाठक एक ही , बैठक में संपूर्ण संपादकीय को पढ़कर सुनिश्चित रूप से आत्मगत संतुष्टि की स्थिति सहज ही निर्मित हो जाती थी तथा विषयगत सामग्री उच्चतम कोटि की होने के कारण उसे सदा आत्मसात करने की अभिलाषा भी अंतरमन में बनी रहती थी क्योंकि समसामयिक विषय सामग्री से लेकर वर्तमान व्यवस्थागत,हस्तक्षेप का गहन दृष्टिकोण ,सदा ही - सधी हुई भाषा शैली का सानिध्य जब पैनी दृष्टि से सुसज्जित भाषा के रूप में समाधानमूलक स्थितियों के संदर्भित प्रसंग में समालोचनात्मक प्रस्तुतीकरण के अंतर्गत एक ही स्थान पर प्राप्त हो जाये तो पाठक के लिए एक गहरे संतोष की अनुभूति से गुजरना सहज हो जाता था ।

12 - साहित्यिक अवदान का विशिष्ट स्वरूप में प्रतिपादन  : -

    ' सृजन के लिए सृजन ' का सृजनात्मक स्वरुप ही , नवाचार को जन्म देने में सहायक होता है जिसकी संस्तुति  -  सुनिश्चित स्वरूप द्वारा साहित्यिक जगत में -         ' अक्षरा ' साहित्यिक पत्रिका - मध्य प्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति की इस प्रतिष्ठित पत्रिका को पद्मश्री दादा श्री कैलाश चंद्र पंत जी ने त्रैमासिक पत्रिका से द्विमासिक पत्रिका ततपश्चात अक्षरा को मासिक पत्रिका बनाया , आपके कुशल संपादन के अंतर्गत अक्षरा पत्रिका साहित्यिक क्षेत्र में पुष्पित और पल्लवित होती रही तथा 18 वर्षों तक आप इसके मुख्य संपादक रहे और इसे देश की अग्रणी साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रतिष्ठापूर्ण स्वरूप में स्थापित कर दिया आपके द्वारा लिखित मौलिक आलेखों के वैविध्यपूर्ण आलोचनात्मक निबंध , समसामयिक वैचारिक लेख के साथ ही सामाजिक और सांस्कृतिक गद्य का चिंतनशील पक्ष , गहनतम सोच को सहज ही प्रतिपादित कर देते हैं , सप्त ऋषि के स्वरूप में अति महत्वपूर्ण सात पुस्तकें -  संपूर्ण मानवता को सुसंस्कारित स्थितियों के द्वारा सुरक्षित एवं संरक्षित करने के विशिष्ट संदर्भ ग्रंथ के रूप में सदा ही मार्गदर्शन एवं परामर्श प्रदान करती रहती हैं

13 - सुखद स्मृतियों के संस्मरण में नवीनतम संस्करण : -

         जीवन की सुखद स्मृतियों में श्रेष्ठतम स्थिति और परिपक्व अवस्थाओं को व्यावहारिक स्वरूप प्रदान करने में दक्षता प्राप्त पद्मश्री दादा श्री कैलाश चन्द्र पंत जी पूर्णतया निपुण व्यक्तित्व के अधिष्ठाता रहे हैं इसलिए उनके संस्मरण में सदैव नवीनतम संस्करण का प्रतिबिंब विद्यमान रहा है जिसकी परिणिति , सृजनात्मकता की नैसर्गिक अनुभूतियों द्वारा संकल्पित समयानुसार प्रतिपादित होना सुनिश्चित हो सका है जिसमें अति महत्वपूर्ण प्रस्तुतियों के अंतर्गत सम्मिलित सप्त ऋषि स्वरूप में अमूल्य सृजन क्रमश: 01 - कौन किसका आदमी - यह उनकी बेहद चर्चित और लोकप्रिय कृतियों में से एक है इस किताब में आधुनिक समाज में गिरते नैतिक मूल्यों , अवसरवादिता और राजनीति के अपराधीकरण पर तीखा कटाक्ष किया गया है ,  02 - धुंध के आर पार - इस पुस्तक में समकालीन विषयों और वैचारिक द्वंद्वों पर गहराई से प्रकाश डाला गया है , 03 - शब्द का विचार पक्ष - भाषा , शब्द और उनके पीछे छिपी वैचारिक शक्ति पर आधारित एक उत्कृष्ट कृति , 04 - संस्कार , संस्कृति और समाज - भारतीय समाज, उसके संस्कारों और सांस्कृतिक मूल्यों के बदलते स्वरूप पर केंद्रित पुस्तक , 05 - संकल्प की प्रतीक्षा में - सामाजिक बदलाव और राष्ट्र निर्माण के संकल्पों को रेखांकित करती कृति , 06 - सांस्कृतिक विखंडन चुनौती और चेतना - आधुनिक समय में हो रहे सांस्कृतिक क्षरण और उससे निपटने की चेतना पर आधारित महत्वपूर्ण पुस्तक , 07 - मालवांचल में कूर्मांचल - यह दादा पंत जी के सम्मान में प्रकाशित एक अभिनंदन - ग्रंथ है जो प्रमुखत: उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को दीर्घकालीन अनुभव के विविध स्वरूप में सुसज्जित करता है ।

14 - व्यक्तित्व , कृतित्व एवं अस्तित्व द्वारा उच्चतम मानदंड  : -

        पद्मश्री दादा श्री कैलाश चन्द्र पंत जी की महानतम कृतियों और पत्रकारिता की दीर्घकालिक साधना के कारण ही उन्हें , " विश्व हिंदी सम्मान - जोहान्सबर्ग " , " गणेश शंकर विद्यार्थी पत्रकारिता सम्मान " और भारत सरकार के पद्म श्री - 2026 , जैसे महान अलंकारों से विभूषित किया गया है  इस प्रकार साहित्यिक - पत्रकारिता जगत में उल्लेखनीय कार्यों के सानिध्य में विशिष्ट अवदान हेतु - साहित्य ,शिक्षा और पत्रकारिता में उनके आजीवन योगदान के लिए उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार मिले हैं -  ' विश्व हिंदी सम्मान ' अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी भाषा के वैश्विक प्रचार - प्रसार के लिए उन्हें दक्षिण अफ्रीका के - जोहान्सबर्ग , में आयोजित 9 वें विश्व हिंदी सम्मेलन में -  इस अत्यंत प्रतिष्ठित - ' अंतर्राष्ट्रीय सम्मान ' से नवाजा गया था ,  ' गणेश शंकर विद्यार्थी पत्रकारिता सम्मान ' का पुरस्कार उन्हें स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता - विशेषकर उनके साप्ताहिक पत्र -  ' जनधर्म ' के लिए उन्हें इस गरिमामयी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था , अत्यंत ही प्रतिष्ठित सम्मान के स्वरूप में - ' सप्रे समाचार पत्र संग्रहालय सम्मान  ' भोपाल के प्रसिद्ध -  सप्रे संग्रहालय द्वारा उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया जा चुका है , अत: हिंदी साहित्य और पत्रकारिता में उनके आजीवन योगदान के लिए उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार प्राप्त हुए हैं

15  - भावनात्मक एवं वैचारिक स्पष्टता का श्रेष्ठतम सामंजस्य  : -

       साहित्यिक अवदान के संदर्भित प्रसंग में पद्मश्री दादा श्री कैलाश चंद्र पंत जी की कृतियों में से सबसे प्रमुख और प्रशंसित पुस्तक - ' कौन किसका आदमी ' का विश्लेषणात्मक अध्ययन यह पूर्ण रूप से स्पष्ट कर देता है कि यह पुस्तक पंत जी के सामाजिक और राजनीतिक चिंतन का एक बेहतरीन जीवंत स्वरूप में दस्तावेज है जिसका मुख्य विषय इस किताब में आधुनिक समाज में गिरते हुये नैतिक मूल्यों , अवसरवादिता और राजनीति के अपराधीकरण पर तीखा कटाक्ष किया गया है पुस्तक के शीर्षक का अर्थ - ' कौन किसका आदमी ' शीर्षक सीधे तौर पर आज की उस व्यवस्था पर चोट करता है जहाँ योग्यता के बजाय -  ' गुटबाजी ' के साथ ही  -   ' चाटुकारिता ' हावी हो चुकी है , लेखन शैली में दादा श्री पंत जी ने बहुत ही सरल लेकिन तीखी और व्यंग्यात्मक भाषा का प्रयोग किया है , यह पुस्तक पाठकों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि - एक ' स्वस्थ समाज के निर्माण ' के लिए वैचारिक स्वतंत्रता कितनी उपयोगी एवं आवश्यक है , पद्मश्री दादा श्री कैलाश चंद्र पंत जी की एक प्रसिद्ध पुस्तक - ' धुंध के आर - पार ' भी है  -  यह पुस्तक दादा पंत जी के दार्शनिक और वैचारिक लेखों का एक बेहतरीन संग्रह है वैचारिक स्पष्टता के द्वारा पुस्तक का मुख्य संदेश स्पष्ट रूप से प्रतिपादित किया गया है कि -  समाज में फैली वैचारिक  - ' धुंध ' अर्थात सभी प्रकार के - ' भ्रम जाल ' से जुड़ी हुई - ' अज्ञानता ' और पश्चिमी संस्कृति के अंधानुकरण ' को पूर्णतया हटाकर सत्य का स्पष्ट रूप से दिग्दर्शन कराया गया है , नैतिकता और मूल्य के संदर्भ में दादा पंत जी ने लिखा है कि - आधुनिकता की दौड़ में इंसान अपने नैतिक मूल्यों को  पूर्णतया खोता जा रहा है , इसलिए - ' धुंध के आर -पार ' देखने का अर्थ है कि -  हम अपनी संस्कारगत जड़ों , अपनी राष्ट्रीय सभ्यता के साथ - साथ संस्कृति और मानवीय मूल्यों को फिर से पहचानें और उन्हें अनुकरण एवं अनुसरण के वृहद स्वरूप में स्वीकार करें , उन्होंने युवाओं को अति महत्वपूर्ण संदेश देते हुए यह भी अभिव्यक्त किया है कि -  प्रस्तुत पुस्तक युवाओं को भटकाव से बचाकर , राष्ट्र निर्माण और समाज सुधार की ओर अग्रसर होने की , दा ही प्रेरणा प्रदान करती रहेगी ।

 

16 - साहित्यिक साधना एवं तपस्या का गरिमामयी सम्मान : -

      

         पद्मश्री दादा श्री कैलाश चंद्र पंत जी के प्रति आम जनमानस सदा से ही आभार युक्त कृतज्ञता के स्वरूप में ऋणी रहा है क्योंकि उन्होंने दीर्घकालीन साहित्यिक साधना , शिक्षा एवं पत्रकारिता के व्यापक परिदृश्य द्वारा - ' आचरण के आचार्य ' स्वरूप में सामाजिक परिवेश को सकारात्मक दृष्टि एवं सार्थक दृष्टिकोण प्रदान करने में स्वयं की सलंग्नता को अनवरत अर्थात अविरल स्वरूप में नित - नूतन आधारभूत स्थितियों  द्वारा - श्रेष्ठ , शुभ एवं पवित्र संकल्पनाओं को सदा से ही मानवीय संवेदनशीलता के संदर्भित प्रसंग में स्थापित किया है जिससे मानवीय अंत:करण को सबल और सक्षम बनाया जा सके , आवश्यकता है अंतरमन से इन मूल्यपरक सिद्धांतों से जुड़े हुए व्यावहारिक समाधान को अनुकरण एवं अनुसरण के माध्यम से आत्मसात करके , आत्म जगत की चैतन्यता को जागृति की प्रासंगिकता से संबद्ध करते हुए स्वयं को गतिशीलता प्रदान करने की , जिससे अधिकार और कर्तव्य के मध्य श्रेष्ठतम सामंजस्य स्थापित करते हुए कर्तव्यनिष्ठ अवस्था की ओर प्रस्थान किया जाना सुनिश्चित हो जाए

          पद्मश्री दादा श्री कैलाश चंद्र पंत जी ने केवल भारतीयता की पृष्ठभूमि में स्वयं को प्रादेशिक स्थितियां के सीमांकन तक अर्थात मध्य प्रदेश में ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर हिंदी को पहचान दिलाने के लिए बहुआयामी संपूर्ण समर्पित स्वरूप में कार्य संपन्न किया है , '  मध्य प्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति ' के माध्यम से उन्होंने दुनिया भर के विद्वानों के सानिध्य में हिंदी प्रेमियों और प्रवासियों को एक मंच पर एकत्रित करने का अथक प्रयास किया है इसलिए उनके कार्य एवं व्यवहार का स्वरूप - ' व्यष्टि से समष्टि की ओर '  अर्थात - ' सूक्ष्म से वृहद की संकल्पना ' से पूर्णतया संबंधित है इसलिए भारत सरकार द्वारा दिए जाने वाले विभिन्न प्रकार के राष्ट्रीय सम्मान तथा भारत के ही विदेश मंत्रालय द्वारा दिये जाने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मान इस बात का प्रमाण हैं कि - पद्मश्री दादा श्री कैलाश चंद्र पंत जी का हिंदी सेवक के रूप में अतुलनीय योगदान केवल प्रादेशिक स्तर पर या ,राष्ट्रीय सीमा तक ही नहीं है , बल्कि वह तो सदा से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के वृहद स्वरूप का रहा है ।

    

        प्रारंभिक शिक्षा और पारिवारिक पृष्ठभूमि  के अंतर्गत पद्मश्री दादा श्री कैलाश चंद्र पंत जी का , मूल संबंध उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र कूर्मांचल से है लेकिन उनका कर्मक्षेत्र मध्य प्रदेश के मालवा और भोपाल अंचल रहा है यही कारण है कि उनके सम्मान में छपे अर्थात निर्मित किए गए प्रमुख रूप से अभिनंदन ग्रंथ का नाम -  ' मालवांचल में कूर्मांचल ' रखा गया था , शिक्षा और हिंदी के प्रति झुकाव के कारण उनकी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा , हिंदी माध्यम से ही संपन्न हुई  , जिसने उनके भीतर अर्थात अंतरात्मा में राष्ट्रभाषा के प्रति गहरा अनुराग सदा के लिए उत्पन्न कर दिया , जिसकी वजह से उन्होंने सरकारी नौकरी का त्याग , शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने शासकीय सेवा अर्थात सरकारी नौकरी जॉइन की थी , लेकिन हिंदी साहित्य की साधना और स्वतंत्र पत्रकारिता की राह में आ रही प्रशासनिक सीमाओं से संबंधित विभिन्न प्रकार की बाधाओं के कारण , उन्होंने गरिमामयी सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया और अपना संपूर्ण जीवन ही साहित्यिक साधना के  सानिध्य में पत्रकारिता की अलग जगाते हुए - राष्ट्रभाषा हिंदी को समर्पित कर दिया ।

            पद्मश्री सम्मान समारोह की गरिमामयी स्थितियों के अंतर्गत वर्ष - 2026 , का पद्म पुरस्कार समारोह , परम आदरणीय दादा श्री कैलाश चंद्र पंत जी के जीवन का एक ऐतिहासिक क्षण रहा है जिसमें  - पुरस्कार की घोषणा और सम्मान भारत के गणतंत्र दिवस , 26 जनवरी , 2026 - की पूर्व संध्या पर उनके नाम की घोषणा -    ' साहित्य और शिक्षा ' क्षेत्र में की गई थी  तथा मार्च - अप्रैल 2026 में राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक दरबार हॉल में आयोजित - ' भव्य नागरिक सम्मान ' समारोह में महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी , ने उन्हें पद्मश्री से अलंकृत किया , गर्व और गौरवान्वित होने के अमूल्य क्षण एवं पल के अंतर्गत  - 90 वर्ष की आयु में जब परम आदरणीय दादा श्री कैलाश चंद्र पंत जी , महामहिम राष्ट्रपति जी से  सम्मान प्राप्त करने हेतु मंच पर पहुँचे , तो पूरे सदन ने करतल ध्वनि से उनका स्वागत किया , यह उनकी - ' सात दशकों की अनवरत साहित्यिक तपस्या का गरिमामयी सम्मान ' था , मध्य प्रदेश के गौरव स्वरूप में इस समारोह में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और संस्कृति मंत्रालय के अधिकारियों ने उन्हें विशेष रुप से बधाई दी , परम आदरणीय पद्मश्री दादा श्री कैलाश चंद्र पंत जी ने इस सम्मान को - " मध्य प्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति " - के हर एक कार्यकर्ता और देश के सभी हिंदी प्रेमियों को समर्पित किया है ।

            साहित्यिक साधना के श्रेष्ठतम पथ पर 90 वर्ष की वरिष्ठतम आयु अर्थात -   ' नवदशकोत्सव ' के उपलब्धिपूर्ण महान अवसर के ' मणि - कांचन ' संयोग के सानिध्य में ' पद्मश्री ' की प्राप्ति और आपके सतायु होने की पवित्रम गौरवान्वित स्थितियों के मंगलकारी स्वरूप हेतु , अनेकानेक अनंत शुभकामनाएं ... एवं हार्दिक आत्मिक बधाई ... , सादर प्रणाम ... ! अभिवादन ... और अभिनंदन ...

                                         

                                     

                                      डॉ. अजय शुक्ल ( व्यवहार वैज्ञानिक )

 दिव्य तपस्या भवन - शासकीय विद्यालय के समीप

ग्राम पंचायत भवन के सामने  ;  ग्राम + पोस्ट - सन्नौड

 जिला - देवास - 455221 - मध्य प्रदेश .

दूरभाष  -  91 31 09 90 97  - कॉलिंग . /  98 26 44 93 85  - व्हाट्सएप .

 Mail -  drajaybehaviourscientist@gmail.com 

drajayshukla@gmail.com

dr.ajay_writertrainer@yahoo.com

Website - www.humanthinker.com

YouTube - Positive Behaviour Dr Ajay Shukla .

 YouTube  - abhmorg , 

( अखिल भारतीय हिंदी महासभा , नई दिल्ली  )

 

 

 

  

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